बंगाल में भीषण हादसे के बाद रेलवे की बड़ी पहल, लेवल क्रॉसिंग पर लगा नया ऑटोमेटिक सुरक्षा सिस्टम
पश्चिम बंगाल में इस साल जुलाई में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद पूर्वी रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस लेवल क्रॉसिंग पर…
पश्चिम बंगाल में इस साल जुलाई में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद पूर्वी रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस लेवल क्रॉसिंग पर पांच लोगों की मौत हुई थी, वहां अब एक आधुनिक 'नॉन-इंटरलॉक्ड लेवल क्रॉसिंग ऑटो पीएन' सिस्टम लगा दिया गया है। बुधवार को पूर्वी रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडे की उपस्थिति में इस नई तकनीक की शुरुआत की गई।
यह हादसा 17 जुलाई की सुबह हुआ था जब करनसुबर्ण और खागड़ाघाट रोड स्टेशनों के बीच एक गेटमैन समय पर रेलवे फाटक बंद नहीं कर पाया था। इसके चलते बच्चों को ले जा रही एक कार तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गई थी। इस टक्कर में कार में सवार चार बच्चों और एक साइकिल सवार की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कार चालक और कई अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद रेल मंत्रालय ने पूर्वी रेलवे को तत्काल सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए थे।
कैसे काम करता है यह नया सिस्टम?
इस नई तकनीक से स्टेशन मास्टर और गेटमैन के बीच समन्वय और संचार को बेहतर बनाया गया है। अब स्टेशन मास्टर लेवल क्रॉसिंग गेट की स्थिति को रियल टाइम में देख सकते हैं। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम स्टेशन मास्टर को ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति देने से पहले यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि फाटक पूरी तरह से बंद है। अब उन्हें सिर्फ गेटमैन की सूचना पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसमें बूम और लीवर लॉकिंग वेरिफिकेशन, फिजिकल ऑथेंटिकेशन और ट्रेन के गुजरने का सटीक पता लगाने जैसी कई तकनीकी सुरक्षा सुविधाएँ शामिल हैं।
महाप्रबंधक ने किया निरीक्षण
बुधवार को महाप्रबंधक गीतिका पांडे ने खुद एक लेवल क्रॉसिंग पर परिचालन प्रक्रियाओं का जायजा लिया। उन्होंने गेटमैन से बात कर सुरक्षा नियमों, फाटक संचालन और आपातकालीन उपायों के बारे में उसकी जानकारी परखी। उन्होंने करनसुबर्ण रेलवे स्टेशन के इंटरलॉकिंग पैनल का भी निरीक्षण किया और ड्यूटी पर मौजूद स्टेशन मास्टर से सिग्नलिंग और ट्रेन संचालन से जुड़े सुरक्षा प्रावधानों की समीक्षा की। रेलवे के अनुसार, यह सिस्टम मानवीय चूक की संभावना को कम करने के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के तौर पर काम करेगा।
इनपुट: IANS



