सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बाजार में गिरावट के बीच वित्त मंत्री का भरोसा, कहा — भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शेयर बाजार में हालिया कमजोरी पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि इसकी एक वजह निवेशकों के लिए बाजार से पैसा निकालने की आसानी है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया…

बाजार में गिरावट के बीच वित्त मंत्री का भरोसा, कहा — भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत
(फोटो: IANS)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय शेयर बाजार में हालिया कमजोरी पर अपनी राय रखते हुए कहा है कि इसकी एक वजह निवेशकों के लिए बाजार से पैसा निकालने की आसानी है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद पूरी तरह मजबूत बनी हुई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सीतारमण ने यह बात आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान कही।

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वित्त मंत्री ने बताया कि बाजार में पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) उपलब्ध है, जिससे निवेशकों को अपने निवेश से बाहर निकलने में आसानी हो रही है। इस साल अब तक घरेलू शेयर बाजार में करीब 12% की गिरावट देखी गई है। इसके बावजूद वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की विकास दर स्थिर बनी हुई है।

पूंजी का बाहर जाना एक बड़ी चुनौती

भविष्य के जोखिमों पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने चेताया कि अगर पूंजी का लगातार बाहर जाना जारी रहता है, तो यह वर्ष 2027 तक भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। डिपॉजिटरी एनएसडीएल के आंकड़े भी इस चिंता की पुष्टि करते हैं, जिनके मुताबिक इस साल अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से 33 अरब डॉलर से ज्यादा की इक्विटी निकाली है।

हालांकि, एक सकारात्मक संकेत में, 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशक 15 कारोबारी सत्रों की लगातार बिकवाली के बाद शुद्ध खरीदार बने और उन्होंने करीब 1,166 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। इसी दिन, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 45 सत्रों से जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ते हुए लगभग 3,661 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की।

AI निवेश और भारत की स्थिति

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी स्वीकार किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े वैश्विक निवेश की मौजूदा लहर का भारत को बड़ा फायदा नहीं मिला है। उन्होंने कहा, "AI और अमेरिका की ओर पूंजी का प्रवाह, जो सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न देशों और क्षेत्रों में निवेश के रूप में जाता है, चिंता का विषय है।" उनके मुताबिक, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को AI कंपनियों में बढ़ते निवेशक हित का अधिक लाभ मिला है।

हालांकि, उन्होंने इसका एक सकारात्मक पहलू भी बताया। सीतारमण ने कहा कि अगर भविष्य में AI निवेशों में वैश्विक स्तर पर गिरावट आती है और बाजार में बड़ी बिकवाली होती है, तो भारत पर इसका असर अपेक्षाकृत कम होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अब उन्नत तकनीक में पिछड़ने वाला देश नहीं है और सरकार सेमीकंडक्टर निर्माण में तेजी से निवेश बढ़ा रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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