शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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AIADMK में नेतृत्व पर घमासान: पलानीस्वामी ने पूर्व मंत्री शनमुगम के 100 से ज़्यादा समर्थकों को पदों से हटाया

तमिलनाडु में लगातार चुनावी हार के बाद AIADMK के भीतर नेतृत्व को लेकर टकराव और गहरा गया है। पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व मंत्री सी.वी. शनमुगम के 100 से…

AIADMK में नेतृत्व पर घमासान: पलानीस्वामी ने पूर्व मंत्री शनमुगम के 100 से ज़्यादा समर्थकों को पदों से हटाया
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में लगातार चुनावी हार के बाद AIADMK के भीतर नेतृत्व को लेकर टकराव और गहरा गया है। पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व मंत्री सी.वी. शनमुगम के 100 से अधिक समर्थकों को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई विल्लुपुरम जिले में की गई है, जो शनमुगम का राजनीतिक गढ़ माना जाता है।

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यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब शनमुगम और पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी की चुनावी हार के कारणों पर चर्चा के लिए तत्काल 'जनरल काउंसिल' की बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। हटाए गए पदाधिकारियों में मयिलम यूनियन के यूनियन-स्तरीय अधिकारी और शाखा सचिव शामिल हैं। यह यूनियन शनमुगम के मयिलम विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो इस कार्रवाई को उनके समर्थकों के खिलाफ एक लक्षित कदम के रूप में दर्शाता है।

नेतृत्व को लेकर कब शुरू हुआ विवाद?

AIADMK में आंतरिक कलह अप्रैल में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद खुलकर सामने आ गई थी। उस समय शनमुगम और वेलुमणि के नेतृत्व वाले एक गुट ने पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे, जिससे पार्टी में दरार पैदा हो गई। इसके बाद से ही शनमुगम अपने समर्थकों के साथ एक अलग गुट के रूप में काम कर रहे हैं, जिससे विल्लुपुरम जिले में पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ गई है।

इससे पहले भी पलानीस्वामी ने शनमुगम को विल्लुपुरम के जिला सचिव पद से हटाकर उनकी जगह पशुपति को नियुक्त कर दिया था। तब से जिले में दो गुट सक्रिय हैं—एक शनमुगम का और दूसरा नवनियुक्त जिला सचिव का।

हालिया हार ने बढ़ाई मुश्किलें

हाल ही में मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में AIADMK के निराशाजनक प्रदर्शन ने इस विवाद को और हवा दे दी है। पार्टी इन दोनों सीटों पर तीसरे स्थान पर रही, जिसके बाद असंतुष्ट नेताओं ने फिर से नेतृत्व की आलोचना शुरू कर दी। इन नतीजों के बाद ही शनमुगम और अन्य नेताओं ने 'जनरल काउंसिल' की बैठक की मांग तेज कर दी थी।

इस ताजा कार्रवाई को पलानीस्वामी द्वारा पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने और असंतोष को दबाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह जुलाई में हुई छंटनी के बाद की गई दूसरी बड़ी कार्रवाई है, जब शनमुगम को जिला सचिव पद से हटाने के बाद उनके कई समर्थकों को भी पद गंवाने पड़े थे।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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