शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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एक ट्रिलियन डॉलर के पार पहुँच सकती है दुनिया की ऊर्जा सब्सिडी, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने चेताया

दुनिया भर में बढ़ती महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सरकारों पर अपने नागरिकों को राहत देने का दबाव बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया…

एक ट्रिलियन डॉलर के पार पहुँच सकती है दुनिया की ऊर्जा सब्सिडी, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने चेताया
(फोटो: IANS)

दुनिया भर में बढ़ती महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सरकारों पर अपने नागरिकों को राहत देने का दबाव बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर मौजूदा हालात बने रहे तो वर्ष 2026 तक वैश्विक ऊर्जा सब्सिडी 1 ट्रिलियन डॉलर के चिंताजनक स्तर को पार कर सकती है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शुक्रवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण सरकारों के लिए सब्सिडी का बोझ उठाना मुश्किल होता जा रहा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, कई देश अपने नागरिकों को ईंधन और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर सब्सिडी, मूल्य नियंत्रण (प्राइस कैप) और टैक्स में छूट जैसे कदम उठा रहे हैं। हालांकि, ये राहत उपाय लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रह सकते, क्योंकि बढ़ती ब्याज दरें, महंगा कर्ज और मौसम से जुड़े जोखिम सरकारों की आर्थिक क्षमता को कमजोर कर रहे हैं।

संकट का बढ़ता दायरा

विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल से सितंबर के बीच राहत उपायों को अपनाने वाले देशों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ऊर्जा और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब ज़्यादा व्यापक होता जा रहा है। यूएनडीपी ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना कई देशों के सार्वजनिक वित्त पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।

यूएनडीपी के मुख्य अर्थशास्त्री जॉर्ज ग्रे मोलिना ने कहा, "अगले कुछ सप्ताह और महीने अनिश्चितता से भरे रह सकते हैं, क्योंकि दुनिया एक साथ कई संकटों का सामना कर रही है। वर्तमान स्थिति से बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है।"

राहत और उसके सामाजिक प्रभाव

इन राहत उपायों का एक सकारात्मक पहलू भी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल सरकारी सहायता कार्यक्रमों ने अनुमानित रूप से 13 करोड़ लोगों को 6.85 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा से नीचे जाने से रोका है। हालांकि, इसकी कीमत सरकारों को अपने बजट पर भारी बोझ उठाकर चुकानी पड़ रही है।

ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का सामाजिक असर भी दिख रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सिर्फ सितंबर महीने में ही बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ कम से कम 10 देशों में विरोध प्रदर्शन और सामाजिक अशांति की घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें सीरिया, ग्वाटेमाला, फिलीपींस, फ्रांस और पुर्तगाल जैसे देश शामिल हैं। यूएनडीपी का अनुमान है कि भू-राजनीतिक तनाव, सख्त वैश्विक वित्तीय हालात और जलवायु संबंधी झटकों का संयुक्त प्रभाव 2027 की शुरुआत तक चरम पर पहुँच सकता है, जिससे कई विकासशील देशों के लिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

इनपुट: IANS

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