कोलकाता दुर्गा पूजा: UNESCO के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की कई टीमों…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की कई टीमों ने कोलकाता में सेन के आवास सहित 10 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह मामला कोलकाता की प्रसिद्ध दुर्गा पूजा को मिले यूनेस्को के दर्जे का गलत इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी से जुड़ा है।
सेन, जो एक गायक से राजनेता बने हैं, और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन पर आरोप है कि उन्होंने 'मास आर्ट' नामक संस्था के जरिए यूनेस्को के नाम पर फर्जी पास बेचकर अवैध कमाई की। ईडी के अधिकारी मंगलवार सुबह दक्षिण कोलकाता के कस्बा स्थित सेन के घर पहुंचे। इसके अलावा, हिंदुस्तान पार्क और हाईलैंड पार्क जैसे इलाकों में भी छापेमारी की गई, जिनमें पूर्व मंत्री के रिश्तेदारों और एक इवेंट मैनेजमेंट कारोबारी के परिसर शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि कोलकाता की दुर्गा पूजा को 2021 में यूनेस्को से मान्यता मिलने के कुछ ही महीनों बाद 'मास आर्ट' नामक संस्था बनाई गई, जिससे मधुचंदा सेन भी जुड़ी हुई हैं। इस संस्था ने खुद को यूनेस्को का 'आधिकारिक भागीदार' बताकर पूजा पंडालों के 'प्रीव्यू शो' के लिए महंगे टिकट बेचे। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस पूरे मामले में शुरुआती अनुमान लगभग 60 करोड़ रुपये की हेराफेरी का है।
शिकायत के मुताबिक, संस्था ने बिना किसी अनुमति के यूनेस्को के नाम और लोगो का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीता। उन्होंने 24 पूजा पंडालों के प्रीव्यू शो के पास 1,749 रुपये से लेकर 5,499 रुपये तक की कीमतों पर बेचे।
कैसे सामने आया फर्जीवाड़ा?
इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब एक अंतरराष्ट्रीय संगठन की ओर से जयदीप मुखर्जी ने इस साल जून में बौबाजार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी और 'मास आर्ट' संस्था को नामजद किया गया था। शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई कि इन पासों के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। 2022 में जहां करीब 19,000 लोगों ने पंजीकरण कराया, वहीं 2023 में यह संख्या 34,000 और 2024 में 61,000 तक पहुंच गई।
पहले इस मामले की जांच कोलकाता पुलिस कर रही थी, लेकिन इसमें बड़ी रकम के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका को देखते हुए बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच अपने हाथ में ले ली।
इनपुट: IANS



