जगन मोहन रेड्डी मामला: 10 साल से लंबित केस में ED ने तेलंगाना हाईकोर्ट से मांगी रोज़ाना सुनवाई
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है…
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तेलंगाना उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ED ने करीब एक दशक से लंबित इन मामलों में तेज़ी लाने और रोज़ाना आधार पर सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई एक मौलिक अधिकार है और आपराधिक न्याय प्रणाली को कार्यवाही में उचित तेज़ी सुनिश्चित करनी चाहिए। एजेंसी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी समेत सभी आरोपियों की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
क्या हैं ये मामले?
ये मामले उस समय के हैं जब वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के पिता आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। ED की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है, जो आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर की गई थी। आरोप है कि कई कॉर्पोरेट संस्थानों और व्यक्तियों को सरकारी लाभ पहुँचाए गए, जिसके बदले में उन कंपनियों ने जगन मोहन रेड्डी और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी कंपनियों में भारी निवेश किया।
ईडी के अनुसार, ऑरोबिंदो फार्मा, हेटेरो ड्रग्स, इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड और रामकी फार्मा सिटी जैसी कई कंपनियों ने भारती सीमेंट कॉर्पोरेशन, जगती पब्लिकेशंस और जननी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी फर्मों में निवेश किया था, जो रेड्डी परिवार से संबंधित हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत इन मामलों में 2016 से 2021 के बीच हैदराबाद की विशेष सीबीआई अदालत में नौ आरोप पत्र दायर किए गए थे।
सुनवाई में क्यों हो रही है देरी?
एजेंसी ने बताया कि विशेष सीबीआई अदालत ने सभी नौ आरोप पत्रों पर संज्ञान तो ले लिया है, लेकिन मामले अभी भी डिस्चार्ज याचिकाओं (आरोपमुक्त करने की अर्जी) की सुनवाई के चरण में अटके हुए हैं। ED के मुताबिक, इन याचिकाओं के लंबित रहने के कारण मुकदमे की प्रगति में काफी देरी हुई है। पीठासीन अधिकारियों के तबादले और अन्य कारणों से इन पर अभी तक कोई फ़ैसला नहीं हो सका है।
ईडी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी का भी हवाला दिया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि आर्थिक अपराध एक अलग श्रेणी के होते हैं और इनसे देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय सेहत को गंभीर खतरा होता है, इसलिए इन्हें गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
इनपुट: IANS



