छत्तीसगढ़ DMF घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, 31.70 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त, 17 लोगों के खिलाफ चार्जशीट
छत्तीसगढ़ में हुए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMF) फंड घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने इस मामले में 31.70 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी…
छत्तीसगढ़ में हुए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMF) फंड घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने इस मामले में 31.70 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, ईडी ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में 17 आरोपियों के खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया है, जिसमें सतपाल सिंह छाबड़ा और मंदीप चावला के नाम शामिल हैं।
यह मामला खनन से प्रभावित क्षेत्रों और समुदायों के विकास के लिए निर्धारित डीएमएफ फंड के दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से इन फंडों का योजनाबद्ध तरीके से गबन किया गया। ईडी की जांच के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों और बिचौलियों के एक संगठित गिरोह ने फंड आवंटन और उपयोग में हेरफेर किया।
कैसे हुआ पूरा घोटाला?
जांच एजेंसी ने बताया कि गिरोह ने उन कामों को प्राथमिकता दी, जिनमें खरीद की लागत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा सकता था। इसके बाद 'रेट-कॉन्ट्रैक्ट' वाली कंपनियों को दिए गए खरीद ऑर्डर की कुल कीमत का 25 से 50 प्रतिशत तक अवैध कमीशन वसूला गया। ईडी का कहना है कि इस कमीशन का एक बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया, ताकि फंड का आवंटन, खरीद ऑर्डर जारी होना और भुगतान प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रहे।
ईडी के अनुसार, यह कमीशन नकद और बैंकिंग चैनलों, दोनों तरीकों से वसूला गया। इसके बाद इसे वैध दिखाने के लिए कई कंपनियों और खातों के जरिए घुमाया गया, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग की भाषा में 'लेयरिंग' कहते हैं। जांच में यह भी सामने आया कि 'बीज निगम' द्वारा गैर-डीएमएफ फंड से की गई खरीदारी में भी इसी तरह से कमीशन वसूला गया था।
अब तक की गिरफ्तारियां और जांच का आधार
इस मामले में सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरोह के मुख्य बिचौलियों और वित्तीय समन्वयकों में से एक माना गया है। उसे 1 सितंबर को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि छाबड़ा चुनिंदा वेंडरों को काम दिलाने, ऑर्डर जारी करवाने, भुगतान करवाने और अवैध कमीशन वसूलकर उसे बांटने में मदद करता था। ईडी ने उससे जुड़ी अपराध की कमाई का आकलन लगभग 35 करोड़ रुपये किया था, जिसके एवज में अब 31.70 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। इस मामले में अब तक आईएएस अधिकारी रामू शाऊ सहित कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
ईडी ने यह जांच रायपुर के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB)/आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग (EOW) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। एजेंसी ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कांकेर जिले और रायपुर ACB/EOW द्वारा दर्ज अन्य एफआईआर को भी अपनी जांच में शामिल कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



