गोवा: ₹2.6 करोड़ की डिजिटल गिरफ्तारी का मामला, 417 करोड़ के बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े तार
एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह ने गोवा की एक महिला को 'डिजिटल गिरफ्तारी' के जाल में फंसाकर उससे 2.6 करोड़ रुपये की उगाही कर ली। अब इस मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक RTGS एजेंट को…
एक बड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह ने गोवा की एक महिला को 'डिजिटल गिरफ्तारी' के जाल में फंसाकर उससे 2.6 करोड़ रुपये की उगाही कर ली। अब इस मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक RTGS एजेंट को गिरफ्तार किया है, जिसके तार 400 करोड़ रुपये से भी बड़े एक राष्ट्रव्यापी फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या छह हो गई है।
ED के एक अधिकारी ने बताया कि मुकेश कुमार पुखराज जैन उर्फ मुकेश भाई को 16 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया गया। गोवा की एक विशेष अदालत ने उसे सोमवार तक के लिए ED की हिरासत में भेज दिया है।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
ED की जांच में सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह है जिसने कंपनियों का एक पूरा नेटवर्क बना रखा है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, पीड़ितों से उगाही गई रकम को बैंक ट्रांसफर के जरिए इन कंपनियों के खातों में मंगाया जाता था। इसके बाद उस रकम को कैश में बदला जाता और फिर विदेशी मुद्रा में परिवर्तित कर दिया जाता था।
आरोपी जैन इसी नेटवर्क के लिए एक आरटीजीएस एजेंट के तौर पर काम करता था। उसका काम नेटवर्क के खातों में बैंक क्रेडिट की व्यवस्था करना और बदले में कमीशन लेकर गिरोह के सरगनाओं को कैश पहुंचाना था। ED ने बताया कि पूछताछ में जैन ने यह बात स्वीकार की है कि उसे पता था कि यह पैसा साइबर धोखाधड़ी से कमाया गया है।
300 से ज़्यादा शिकायतें, 160+ FIR
यह मामला सिर्फ गोवा तक ही सीमित नहीं है। ED के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों के खिलाफ 20 से ज़्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक शिकायतें और 160 से ज़्यादा FIR दर्ज हैं। इन सभी मामलों में पीड़ितों को कुल मिलाकर लगभग 417 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
गोवा की पीड़िता के मामले में, ठगों ने उसे एक वीडियो कॉल पर लेकर यह यकीन दिलाया कि उसके खिलाफ एक आपराधिक जांच चल रही है। इसी डर का फायदा उठाकर उसे अलग-अलग फर्जी खातों में करीब 2.6 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने पर मजबूर किया गया। यह जांच उत्तरी गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू हुई थी।
आरोपी ने नष्ट किए सबूत
केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि जब गिरोह के कुछ ठिकानों पर ED ने तलाशी ली, तो आरोपी जैन ने कारोबार से जुड़े सबूत वाले रिकॉर्ड और मोबाइल हैंडसेट नष्ट कर दिए थे। वह पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर भी पेश नहीं हुआ और बाद में पेश होने पर टालमटोल भरे जवाब देता रहा।
इनपुट: IANS



