कर्नाटक: सूखे की मार के बीच सरकार के वित्तीय संकट पर भाजपा ने उठाए सवाल
कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति पर विधानसभा में चर्चा के दौरान, राज्य के वित्त विभाग के एक पत्र ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि…
कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति पर विधानसभा में चर्चा के दौरान, राज्य के वित्त विभाग के एक पत्र ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इस पत्र का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया सरकार गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है, जिससे सूखे से निपटने के प्रयासों पर बुरा असर पड़ सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा नेता ने दावा किया कि सरकार की उधार लेने की क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है और नई योजनाओं के लिए धन जुटाना मुश्किल हो गया है।
मंगलवार को विधानसभा में अपनी बात रखते हुए अशोक ने 17 सितंबर के वित्त विभाग के एक आंतरिक संवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस पत्र से साफ है कि राज्य की वित्तीय सेहत ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कम बारिश की चेतावनी के बावजूद सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए, जिससे हालात और बिगड़े।
राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर आरोप
आर. अशोक ने आँकड़ों के साथ सरकार की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) FRBM फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित 3% की सीमा के करीब, यानी 2.95% पर पहुँच गया है। उनके अनुसार, राजस्व घाटा 22,952 करोड़ रुपये था, जबकि राज्य पर कुल बकाया देनदारियाँ GSDP के 24.94% तक पहुँच गई थीं, जो कि 25% की अधिकतम सीमा के बेहद करीब है।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने यह भी कहा कि लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के बिल लंबित हैं, जिनमें से अकेले चार प्रमुख विभागों के ही 36,136 करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने इसे "वित्तीय सूखा" करार देते हुए कहा, "प्राकृतिक सूखे से तभी निपटा जा सकता है जब सरकार में वित्तीय सूखा न हो।"
सूखे की घोषणा में देरी का आरोप
अशोक ने सरकार पर सूखे से निपटने की तैयारियों में देरी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्र सरकार ने अप्रैल में ही अल नीनो के प्रभाव को लेकर चेतावनी जारी कर दी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कैबिनेट नोट अप्रैल में ही जमा हो गया था, तो सरकार को सूखा घोषित करने में चार महीने क्यों लग गए?
उन्होंने पीने के पानी, चारे की व्यवस्था, पशु शिविर और बोरवेल की मरम्मत के लिए अपर्याप्त इंतजामों का भी आरोप लगाया। अशोक ने क्लाउड सीडिंग पर खर्च हुए 28 करोड़ रुपये की भी आलोचना की और दावा किया कि इससे किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ।
विपक्ष की प्रमुख माँगें
चर्चा के दौरान, विपक्ष के नेता ने सरकार के सामने कई माँगें रखीं। इनमें किसानों का कृषि ऋण माफ करना, 50,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देना, ग्रामीण योजनाओं के तहत रोजगार सुनिश्चित करना, चारे का भंडारण करना और 5,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित प्राकृतिक आपदा कोष को तत्काल लागू करना शामिल है।
इनपुट: IANS



