बुधवार, 9 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
दुनिया

कांगो में इबोला का गंभीर संकट: स्वास्थ्य केंद्रों से बाहर बढ़ रही मौतें, WHO ने जताई गहरी चिंता

अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला महामारी एक चिंताजनक और जटिल रूप लेती जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती यह बनकर उभरी है कि अब स्वास्थ्य…

कांगो में इबोला का गंभीर संकट: स्वास्थ्य केंद्रों से बाहर बढ़ रही मौतें, WHO ने जताई गहरी चिंता
(फोटो: IANS)

अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में इबोला महामारी एक चिंताजनक और जटिल रूप लेती जा रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती यह बनकर उभरी है कि अब स्वास्थ्य केंद्रों के बजाय समुदायों के भीतर लोगों की मौतें बढ़ रही हैं, जिससे कुल मृत्यु दर में हुई पिछली गिरावट पर संकट मंडराने लगा है।

विज्ञापन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि 31 अगस्त से 6 सितंबर के बीच हुई कुल मौतों में से 75% मौतें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गईं। यह आंकड़ा दो हफ्ते पहले के 56.6% की तुलना में एक बड़ी और चिंताजनक बढ़ोतरी है। यह स्थिति दिखाती है कि बीमारी की गंभीरता को समझने, मामलों की समय पर पहचान और मरीजों को इलाज केंद्रों तक पहुंचाने में गंभीर चुनौतियां आ रही हैं।

महामारी का बदलता स्वरूप

WHO की बाहरी स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रकोप अब अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रुख अपना रहा है। जहाँ कुछ इलाकों में संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं, वहीं दूसरी जगहों पर यह तेज़ी से बढ़कर नए क्षेत्रों में फैल रहा है। इस असमान फैलाव ने महामारी पर काबू पाने के प्रयासों को और भी मुश्किल बना दिया है। WHO ने डीआरसी के भीतर संक्रमण फैलने के ख़तरे को 'बहुत उच्च' और पड़ोसी देशों के लिए 'उच्च' श्रेणी में रखा है।

आंकड़ों में संकट की गंभीरता

6 सितंबर तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इबोला के कुल 6,686 पुष्ट मामले सामने आए और 3,226 लोगों की मौत हो चुकी है। संक्रमण से होने वाली मृत्यु दर 48.3% दर्ज की गई है। यह प्रकोप स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी जानलेवा साबित हुआ है, अब तक 167 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं, जिनमें से 47 की मौत हो चुकी है।

टीकाकरण और वैश्विक प्रतिक्रिया

इस संकट से निपटने के लिए टीकाकरण अभियान भी जारी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 27 अगस्त से अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों और जोखिम वाले लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। 6 सितंबर तक 2,007 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका था। फिलहाल, विशेषज्ञ यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि 'एर्वेबो' नामक लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन मौजूदा बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी है या नहीं। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम (IHR) आपात समिति ने भी इस प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' करार दिया है, जो अभी नियंत्रण से बहुत दूर है। यह प्रकोप न केवल कांगो के इतिहास की सबसे बड़ी इबोला महामारी है, बल्कि 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी महामारी भी है।

इनपुट: IANS

N

News4Social इंटरनेशनल डेस्क

News4Social इंटरनेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →