विपक्षी रैली से व्यापार ठप होने की आशंका पर घमासान, हन्नान मोल्लाह ने सरकार पर लगाए दोहरे मापदंड के आरोप
नई दिल्ली में 1 नवंबर को कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों और विपक्षी दलों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। एक ओर जहां कारोबारी नुकसान की आशंका जता रहे हैं, वहीं सीपीआई (एम) के…
नई दिल्ली में 1 नवंबर को कांग्रेस की प्रस्तावित रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों और विपक्षी दलों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। एक ओर जहां कारोबारी नुकसान की आशंका जता रहे हैं, वहीं सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता हन्नान मोल्लाह ने इसे विपक्ष के कार्यक्रम को रोकने का बहाना करार दिया है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने सरकार पर घबराहट में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
यह पूरा विवाद 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (सीटीआई) की उस अपील के बाद शुरू हुआ, जो उन्होंने शुक्रवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से की थी। सीटीआई ने आग्रह किया कि रामलीला मैदान में होने वाली इस रैली को दीपावली तक के लिए टाल दिया जाए। संगठन का तर्क है कि इससे दिल्ली के प्रमुख बाजारों में व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।
व्यापारियों की चिंता और नुकसान का अनुमान
सीटीआई ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि कांग्रेस की इस रैली के कारण दिल्ली के करीब 30 प्रमुख बाजारों में कामकाज बाधित हो सकता है। उनके आकलन के मुताबिक, इस एक दिन की बाधा से लगभग 10,000 से 12,000 करोड़ रुपए के व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है।
'सरकार के बहाने' : हन्नान मोल्लाह का पलटवार
व्यापारिक चिंताओं को खारिज करते हुए हन्नान मोल्लाह ने इसे विपक्ष की रैली को कमजोर करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा, "ये सब बहाने हैं, क्योंकि सरकार घबराई हुई है। पहले उन्होंने अनुमति दी, अब वे इसे रोक नहीं सकते, इसलिए इसे रोकने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा, "एक दिन की रैली से बाजार बंद नहीं होते और न ही कामकाज रुकता है, बाजार चलते रहते हैं। ये सब विपक्ष की रैली को बदनाम करने के बहाने हैं।"
CEC के खिलाफ प्रतीकात्मक 'महाभियोग' कार्यक्रम
इस बीच, विपक्षी गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित 'पीपल्स इम्पीचमेंट' कार्यक्रम पर भी मोल्लाह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि यह कोई औपचारिक संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक 'मॉक' सत्र होगा, जिसका उद्देश्य सीईसी पर लगे आरोपों को जनता के सामने लाना और जागरूकता फैलाना है। उन्होंने कहा, "आधिकारिक तौर पर महाभियोग संसद में होता है, लेकिन यह एक प्रतीकात्मक सत्र होगा।" मोल्लाह के अनुसार, कार्यक्रम में आरोपों को पेश कर चर्चा के बाद एक प्रतीकात्मक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। हालांकि, शुक्रवार को दिल्ली में हुई बारिश के कारण इस कार्यक्रम को शनिवार तक के लिए टालना पड़ा।
इनपुट: IANS



