पॉक्सो मामला: वीरमणि को बचाने के आरोपों पर DMK ने मुख्यमंत्री विजय और दो मंत्रियों से पूछताछ की मांग की
यौन शोषण के एक हाई-प्रोफाइल मामले में तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है। जेम ग्रुप के चेयरमैन आर. वीरमणि से जुड़े पॉक्सो मामले में अब सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट…
यौन शोषण के एक हाई-प्रोफाइल मामले में तमिलनाडु की राजनीति गरमा गई है। जेम ग्रुप के चेयरमैन आर. वीरमणि से जुड़े पॉक्सो मामले में अब सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने विशेष जांच दल (SIT) से मांग की है कि वह मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और दो मंत्रियों से उनके उन बयानों को लेकर पूछताछ करे, जिनमें उन्होंने DMK पर आरोपी को बचाने का आरोप लगाया था।
DMK के कोषाध्यक्ष और सांसद टी.आर. बालू ने इस संबंध में SIT को एक याचिका सौंपी है। याचिका में मुख्यमंत्री विजय के अलावा मंत्री अधव अर्जुन और कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार के दावों के पीछे के सबूत मांगे गए हैं। उल्लेखनीय है कि आर. वीरमणि को नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है और यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
क्या हैं मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आरोप?
DMK की याचिका में तीन विशिष्ट बयानों का उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार, 25 सितंबर को मुख्यमंत्री विजय ने आरोप लगाया था कि DMK आरोपी वीरमणि को संरक्षण दे रही है। उसी दिन, मंत्री अधव अर्जुन ने दावा किया कि पार्टी ने न केवल वीरमणि को बचाया, बल्कि उनके खिलाफ एक पुराने मामले को भी गलत तरीके से बंद करवा दिया था। इसके एक दिन बाद, 26 सितंबर को कानून मंत्री निर्मल कुमार ने यह आरोप लगाया कि वीरमणि को बचाने के बदले DMK को 500 करोड़ रुपये मिले थे।
DMK ने जांच की मांग क्यों की?
इन आरोपों को 'मानहानिपूर्ण' बताते हुए DMK ने SIT से इनकी सत्यता की जांच करने का आग्रह किया है। टी.आर. बालू ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि इन नेताओं के पास मामले से जुड़े ऐसे सबूत हो सकते हैं जो उन्होंने अभी तक पुलिस के साथ साझा नहीं किए हैं। याचिका में यह भी आशंका जताई गई है कि उन्हें जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी, जैसे केस डायरी की सामग्री, मिल गई हो जिसे उन्होंने सार्वजनिक कर दिया।
DMK ने SIT से आग्रह किया है कि वह मुख्यमंत्री और दोनों मंत्रियों को तलब करे, उनके बयान दर्ज करे और उनके दावों के समर्थन में मौजूद कोई भी दस्तावेज़ या सबूत हासिल करे। बालू ने SIT से सबूतों को नष्ट होने से बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने कहा कि अगर जांच में यह साबित होता है कि सबूत छिपाए गए या जानबूझकर झूठे आरोप लगाए गए, तो पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि पद की परवाह किए बिना, अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
इनपुट: IANS



