दिल्ली: 1.59 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा, पुलिस ने 4 अलग-अलग नेटवर्क का किया भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए कई संगठित नेटवर्कों का पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस ने चार अलग-अलग अभियानों में कुल छह आरोपियों को…
दिल्ली पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए कई संगठित नेटवर्कों का पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस ने चार अलग-अलग अभियानों में कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो 'म्यूल' बैंक खाते मुहैया कराने, फर्जी सिम कार्ड जारी करने और एपीके-आधारित धोखाधड़ी में शामिल थे। इन नेटवर्कों से जुड़ी 125 शिकायतों में पीड़ितों को लगभग 1.59 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया था।
दिल्ली पुलिस के आउटर नॉर्थ जिले के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा की गई इस कार्रवाई में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि कैसे ये गिरोह आम लोगों को लालच देकर या उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर साइबर अपराधियों के लिए मददगार बन रहे थे।
फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड का जाल
एक मामले में, पुलिस ने 19 वर्षीय देवेंद्र उर्फ सचिन को 24 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने अपने साथी मोहित के साथ मिलकर शाहबाद डेयरी के निवासियों को बीमा लाभ और पैसे का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए। इसके बाद वे इन खातों की बैंकिंग किट लेकर उन्हें हैदराबाद स्थित एक साइबर क्राइम नेटवर्क को सौंप देते थे। इस गिरोह ने करीब 70 बैंक खाते तैयार किए और कमीशन के तौर पर 10% रकम अपने पास रखी। पुलिस के मुताबिक, इस मामले से जुड़ी 9 शिकायतों में करीब 14.51 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है। आरोपी मोहित पहले से ही एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में बंद है।
एक अन्य नेटवर्क फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराने का काम करता था। पुलिस ने इस सिलसिले में अतुल, समीर उर्फ सैम और पंकज को गिरफ्तार किया है। अतुल, जो एक टेलीकॉम डीलर है, ग्राहकों के दस्तावेजों और तस्वीरों का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना अतिरिक्त सिम कार्ड हासिल करने के लिए करता था। इन सिम कार्ड्स को वह करीब 1,500 रुपये प्रति सिम के हिसाब से अपने साथियों को बेच देता था। इस तरीके से लगभग 187 फर्जी सिम कार्ड हासिल किए गए, जिनका इस्तेमाल 1.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ी 114 शिकायतों में किया गया।
एपीके-आधारित धोखाधड़ी और संपत्ति की जांच
पुलिस ने एक तीसरे मामले में सुमित नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने अपने तीन बैंक खाते 20,000 रुपये में विक्की चौहान नाम के एक व्यक्ति को बेचे थे। इन खातों का इस्तेमाल करीब 4.5 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी में हुआ। पुलिस अब विक्की चौहान और अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है।
चौथे अभियान में, पुलिस ने 18 अगस्त को पंजाब के जालंधर से सौरव को गिरफ्तार किया, जो एपीके-आधारित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा था। उसके मोबाइल से 124 बैंक खातों और कार्डों की जानकारी मिली है। जांच में पता चला कि सौरव ने ऑनलाइन सोना और गिफ्ट कार्ड खरीदकर धोखाधड़ी से कमाए गए लगभग 3.73 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस रकम से खरीदी गई एक 500 वर्ग गज की बेकरी फैक्ट्री और एक कार भी जांच के दायरे में है। सौरव पहले भी साइबर अपराध के आठ मामलों में शामिल रहा है।
बरामदगी और पीड़ितों को राहत
इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 8 मोबाइल फोन, 8 एटीएम कार्ड, 7 चेक बुक, दो पासबुक और एक पीओएस डिवाइस समेत अन्य सामान जब्त किया है। दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि जांच के दौरान साइबर धोखाधड़ी के शिकार लोगों को 1.12 करोड़ रुपये वापस दिलाए गए हैं, जबकि एमआरएम पोर्टल के माध्यम से 74.94 लाख रुपये की वापसी सुनिश्चित की गई है।
इनपुट: IANS



