सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

दिल्ली में कम दोषसिद्धि दर और बढ़ते लंबित मामले: उपराज्यपाल ने अभियोजन विभाग को दिए कड़े निर्देश

दिल्ली में कम दोषसिद्धि दर (कनविक्शन रेट) और अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों पर उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने गहरी चिंता जताई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को अभियोजन निदेशालय के…

दिल्ली में कम दोषसिद्धि दर और बढ़ते लंबित मामले: उपराज्यपाल ने अभियोजन विभाग को दिए कड़े निर्देश
(फोटो: IANS)

दिल्ली में कम दोषसिद्धि दर (कनविक्शन रेट) और अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों पर उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने गहरी चिंता जताई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को अभियोजन निदेशालय के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक में उन्होंने न्याय प्रक्रिया में जवाबदेही और आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया।

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उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि न्याय में देरी को न्याय से इनकार का रूप नहीं लेने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि मुकदमों के दौरान होने वाली टाली जा सकने वाली देरी और प्रक्रियागत चूकों को हर हाल में दूर किया जाना चाहिए, ताकि अभियोजन निदेशालय बेहतर परिणाम दे सके।

जवाबदेही और सुधार के अहम निर्देश

दोषसिद्धि की दर में सुधार लाने के लिए उपराज्यपाल ने कई तत्काल और परिणाम-उन्मुख कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चार्जशीट की 'प्री-ट्रायल' (मुकदमे से पहले) जांच को मजबूत किया जाए, सुनवाई टालने की घटनाओं को कम किया जाए और गवाहों को समय पर अदालत में पेश करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "न्याय में देरी का मतलब न्याय से इनकार नहीं है। हर ऐसी देरी और चूक को दूर किया जाना चाहिए जिसे टाला जा सकता है।"

संधू ने अधिकारियों से यह भी कहा कि जिन मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं, उनका विश्लेषण कर कमियों की पहचान की जाए और हर स्तर पर जवाबदेही तय हो। उन्होंने जांच की गुणवत्ता और सबूत जुटाने के मामले में जांच अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराने का सुझाव दिया।

आपसी समन्वय और नई प्रक्रियाओं पर जोर

बैठक में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर भी बल दिया गया। उपराज्यपाल ने अभियोजकों, दिल्ली पुलिस और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के बीच दैनिक समन्वय को मजबूत करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि जहां भी कानूनी रूप से संभव हो, वहां 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' (आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा) की प्रक्रिया शुरू की जाए। संधू ने वरिष्ठ अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की समय-सीमाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा ताकि न्याय समय पर मिल सके।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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