AI से बनाई PM मोदी के साथ महिला की मॉर्फ्ड तस्वीर का मामला, दिल्ली हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई आपत्तिजनक तस्वीर को सोशल मीडिया से हटाने की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई आपत्तिजनक तस्वीर को सोशल मीडिया से हटाने की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के सामने इस मामले का उल्लेख किया गया, जिसके बाद अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई करने का आश्वासन दिया।
यह मामला एक महिला की तस्वीर के दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेताओं ने शेयर किया था। याचिकाकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी तस्वीर को बिना इजाजत के इस्तेमाल किया गया और AI फेस-स्वैपिंग टूल की मदद से प्रधानमंत्री के साथ एक आपत्तिजनक फोटो पर लगा दिया गया।
क्या हैं याचिकाकर्ता के आरोप?
याचिका में बताया गया है कि यह घटना जुलाई महीने में जंतर-मंतर पर CJP द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई। आरोप है कि इस मॉर्फ्ड तस्वीर को बैनरों पर छापकर प्रदर्शन में इस्तेमाल किया गया और अपमानजनक नारे भी लगाए गए। इतना ही नहीं, इन बैनरों और घटना के वीडियो को इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और यहां तक कि पोर्नोग्राफिक वेबसाइटों पर भी अपलोड कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने इस पूरी घटना को एक 'दुर्भावनापूर्ण, सुनियोजित साइबर हमला, सार्वजनिक चरित्र हनन और डीपफेक' करार दिया है।
पुलिस कार्रवाई और धमकियां
शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने 24 सितंबर को नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली थी। हालांकि, याचिका में कहा गया है कि FIR दर्ज होने के बावजूद, आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए।
महिला ने बताया है कि तस्वीर के लगातार प्रसार के कारण उसे जान से मारने और बलात्कार की धमकियां मिल रही हैं, जिससे उसे गंभीर मानसिक आघात पहुंचा है।
अदालत से क्या मांग की गई है?
याचिका में अदालत से अधिकारियों को सोशल मीडिया और पोर्न वेबसाइटों से मॉर्फ्ड तस्वीरों को तुरंत ट्रेस करने, ब्लॉक करने और हटाने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने अपनी जान की सुरक्षा और साइबर हमले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने का भी आग्रह किया है। इस मामले में चार CJP नेताओं—सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह—के साथ दिल्ली सरकार और मेटा प्लेटफॉर्म्स इंडिया को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
इनपुट: IANS



