अदालत में झूठा बयान देना पड़ा महंगा, दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 CBI अधिकारियों पर कार्रवाई का दिया आदेश
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के छह अधिकारियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसले में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। इन अधिकारियों पर अदालत के समक्ष जानबूझकर झूठा…
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के छह अधिकारियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसले में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है। इन अधिकारियों पर अदालत के समक्ष जानबूझकर झूठा बयान देने का आरोप है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला एक भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के केस से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति मधु जैन की एकल पीठ ने यह आदेश IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल द्वारा दायर एक आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अग्रवाल ने निचली अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें इन CBI अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला IRS अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ CBI द्वारा चलाए गए आय से अधिक संपत्ति के मुकदमे से शुरू हुआ था। यह मुकदमा 26 नवंबर 2002 को दी गई एक मंजूरी पर आधारित था। हालांकि, जनवरी 2016 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मंजूरी को ही अमान्य घोषित कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप विशेष न्यायाधीश ने मार्च 2016 में अग्रवाल को बरी कर दिया।
इसके बाद, CBI ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने पर विचार किया। लेकिन 8 जून 2016 को विधि एवं न्याय मंत्रालय ने कानूनी राय दी कि इस मामले को आगे ले जाने का कोई उचित आधार नहीं है। यह राय 1 जुलाई 2016 को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के माध्यम से CBI को बता दी गई थी।
अदालत में 'झूठा' बयान
जब अग्रवाल ने जांच के दौरान जब्त किए गए अपने दस्तावेज वापस मांगे, तो CBI ने 2 अगस्त 2016 को इसका विरोध किया। CBI ने अदालत में कहा कि "इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के संबंध में प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है।"
अग्रवाल ने इसी बयान को चुनौती देते हुए कहा कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत था, क्योंकि उस समय ऐसा कोई पत्राचार नहीं चल रहा था और CBI को पहले ही मामला आगे न बढ़ाने की राय मिल चुकी थी। उच्च न्यायालय ने पाया कि CBI ने 8 अगस्त को ही DOPT को मामले पर पुनर्विचार के लिए प्रस्ताव भेजा था, यानी बयान देने के बाद।
न्यायालय का सख्त निर्देश
उच्च न्यायालय ने अब विशेष न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वह छह अधिकारियों — सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद — के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करें। यह शिकायत IPC की धारा 191, 193 और 209 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए होगी। अदालत ने यह भी कहा है कि यह शिकायत चार सप्ताह के भीतर संबंधित मजिस्ट्रेट को भेज दी जाए।
इनपुट: IANS



