शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

नेशनल कॉन्फ्रेंस में दरार: सांसद आगा रुहुल्लाह 3 नवंबर को देंगे इस्तीफा, अब्दुल्ला परिवार पर 'वादाखिलाफी' का आरोप

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के ही सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी नेतृत्व, खासकर अब्दुल्ला परिवार, के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है…

नेशनल कॉन्फ्रेंस में दरार: सांसद आगा रुहुल्लाह 3 नवंबर को देंगे इस्तीफा, अब्दुल्ला परिवार पर 'वादाखिलाफी' का आरोप
(फोटो: IANS)

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के ही सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी नेतृत्व, खासकर अब्दुल्ला परिवार, के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वे 3 नवंबर को पार्टी और अपनी लोकसभा सीट, दोनों से इस्तीफा दे देंगे। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रुहुल्लाह ने अब्दुल्ला परिवार पर जम्मू-कश्मीर को अपनी 'पारिवारिक जागीर' समझने और जनता से किए गए वादों को पूरा न करने का गंभीर आरोप लगाया है।

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शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, "युवराज और उनका गुट जम्मू-कश्मीर को अपनी पारिवारिक जागीर मानते हैं। वे चाहते हैं कि लोग वोट दें और फिर अपनी 'औकात' में रहें।" उन्होंने अपने इस्तीफे की तारीख दोहराते हुए इस फैसले के पीछे की वजह भी स्पष्ट की।

आरोप और वादों का हवाला

रुहुल्लाह ने आरोप लगाया कि अब्दुल्ला परिवार लोगों को मूर्ख समझता है। उन्होंने कहा, "जब उनसे अपने ही घोषणापत्र का पालन करने के लिए कहा जाता है, तो वे हमें ही समझाने लगते हैं कि हम 'रियलपॉलिटिक' (व्यावहारिक राजनीति) को कितना कम समझते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और लोगों के अधिकारों की रक्षा जैसे वादों पर सत्ता हासिल की, लेकिन बाद में उन्हें पूरा करने की उम्मीद करने वालों को ही मूर्ख समझा गया। पवित्र कुरान की 'सूरह अल-इसरा' की आयत (17:24) का हवाला देते हुए उन्होंने अब्दुल्ला परिवार को याद दिलाया, "अपने वादों को पूरा करें, क्योंकि आपसे निश्चित रूप से उनके बारे में जवाब मांगा जाएगा।"

विवाद की पृष्ठभूमि और इस्तीफे का फैसला

नेशनल कॉन्फ्रेंस और आगा रुहुल्लाह के बीच मतभेद अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से ही शुरू हो गए थे। जब पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे पर 'व्यावहारिक राजनीति' का रुख अपनाया, तो रुहुल्लाह ने इसका मुखर विरोध किया। इसी के चलते उन्होंने 2020 में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था। 2024 के चुनावों के बाद यह तनाव और बढ़ गया, जब रुहुल्लाह ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि एनसी ने संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई छोड़ दी है और केवल राज्य का दर्जा पाने के लिए नई दिल्ली के सामने 'भीख' मांग रही है। विवाद बढ़ने पर फारूक अब्दुल्ला ने उन्हें इस्तीफा देने की चुनौती दी थी।

रुहुल्लाह ने कहा कि श्रीनगर की सीट लोगों से किए गए एक वादे के आधार पर जीती गई थी। उन्होंने साफ किया, "मैं इस वादे के साथ विश्वासघात करने में भागीदार बनने के बजाय, अपनी (श्रीनगर की) सीट छोड़ देना बेहतर समझता हूं।" उन्होंने यह भी बताया कि 3 नवंबर को वह बडगाम के 'बहिश्त-ए-जहरा पार्क' में लोगों को संबोधित करेंगे और अपने कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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