केरल लोक सेवा आयोग पर नए आरोप, अब पुलिस उपाधीक्षक भर्ती प्रक्रिया संदेह के घेरे में
केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) एक बार फिर विवादों में है। राज्य योजना बोर्ड में भर्ती संबंधी अनियमितताओं को लेकर पहले से ही विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल का सामना कर रहे आयोग पर अब पुलिस उपाधीक्षक (DSP)…
केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) एक बार फिर विवादों में है। राज्य योजना बोर्ड में भर्ती संबंधी अनियमितताओं को लेकर पहले से ही विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल का सामना कर रहे आयोग पर अब पुलिस उपाधीक्षक (DSP) की नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एक नई शिकायत में इस भर्ती प्रक्रिया की तेज़ी पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि डीएसपी पद के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया को असामान्य गति से पूरा किया गया। इस पद के लिए लिखित परीक्षा पिछले साल दिसंबर में हुई, रैंक लिस्ट मई के पहले सप्ताह में जारी कर दी गई और जून में ही नियुक्ति आदेश भी दे दिए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा हो गया है।
शिकायत और मुख्य आरोप
यह शिकायत 'सेव यूनिवर्सिटी कैंपेन कमेटी' के अध्यक्ष आर.एस. शशिकुमार ने दर्ज कराई है, जिन्होंने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के समक्ष इस मामले को उठाया है और चयन प्रक्रिया की विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पहली रैंक हासिल करने वाला उम्मीदवार एसएफआई का नेता है और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
हालांकि, आरोपी उम्मीदवार ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि वह पीएससी की अन्य परीक्षाओं की रैंक लिस्ट में भी शामिल है और यह शिकायत उसकी नियुक्ति को रोकने के इरादे से की गई है।
पहले से चल रही है बड़ी जांच
यह नया विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब केपीएससी पहले से ही एक बड़ी जांच के दायरे में है। मई में सत्ता में आने के बाद सतीशन सरकार ने क्राइम ब्रांच की एक एसआईटी का गठन किया था। यह टीम राज्य योजना बोर्ड में एक वरिष्ठ पद पर हुई भर्ती में लगे आरोपों की जांच कर रही है।
इस जांच के सिलसिले में पीएससी अध्यक्ष डॉ. एम.आर. बैजू और तीन अन्य सदस्यों से पहले ही पूछताछ हो चुकी है। सोमवार से बाकी 12 सदस्यों से भी पूछताछ की जानी है। आयोग के सचिव साजू जॉर्ज भी सोमवार को लगातार दूसरे दिन एसआईटी के सामने पेश होंगे। गौरतलब है कि पीएससी के सभी 16 मौजूदा सदस्य पिछली पिनाराई विजयन सरकार के 10 साल के कार्यकाल के दौरान नियुक्त हुए थे, जो इस साल मई में समाप्त हुआ।
इनपुट: IANS



