बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

राहुल गांधी मामले में 'मीडिया का ध्यान खींचने' की कोशिश पर CJI ने वकील को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक वकील को उस समय मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की नाराजगी का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की तत्काल…

राहुल गांधी मामले में 'मीडिया का ध्यान खींचने' की कोशिश पर CJI ने वकील को फटकारा
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक वकील को उस समय मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की नाराजगी का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। CJI ने वकील के तर्कों को 'बिना सिर-पैर' का बताते हुए फटकार लगाई और सवाल किया कि क्या यह सब केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील ने अपनी मांग के समर्थन में दलील दी कि राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के 200 अधिकारियों के संपर्क में हैं। इस दलील पर आपत्ति जताते हुए CJI सूर्यकांत ने वकील से पूछा, "क्या आपने इसके लिए किसी न्यूज चैनल से बात की है?"

क्यों लगी फटकार और क्या हुआ असर?

मुख्य न्यायाधीश ने वकील को डांटते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि वह सिर्फ मीडिया में चर्चा पाने के लिए इस मामले को उठाना चाहते हैं। इस घटना के बाद, CJI ने अदालत के कर्मचारियों को मौखिक निर्देश दिया कि भविष्य में मामलों को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया (मेंशनिंग) की लाइव स्ट्रीमिंग बंद कर दी जाए।

क्या है यह पूरा मामला?

यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की एक शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पास उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति है। इस मामले में पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI और ED को आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था।

हालांकि, कांग्रेस नेता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने CBI और ED को भी हाईकोर्ट के सामने कोई भी रिपोर्ट पेश करने से मना कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि किसी एजेंसी को आय से अधिक संपत्ति की जानकारी मिलती है, तो वह अदालत के आदेश के बिना भी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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