CISF का बड़ा पुनर्गठन: 1 नवंबर से कार्य-आधारित नई सेक्टर व्यवस्था लागू होगी
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अपने दशकों पुराने प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। 1 नवंबर से बल में क्षेत्रीय अधिकार-क्षेत्र पर आधारित व्यवस्था की जगह कार्य-आधारि…
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अपने दशकों पुराने प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। 1 नवंबर से बल में क्षेत्रीय अधिकार-क्षेत्र पर आधारित व्यवस्था की जगह कार्य-आधारित (sector-specific) निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य CISF की कार्यकुशलता और समन्वय को बेहतर बनाना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।
बल का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि CISF की जिम्मेदारियां अब पारंपरिक औद्योगिक सुरक्षा से आगे बढ़कर कई नई और विशेष भूमिकाओं तक फैल गई हैं। पहले, प्रशासनिक और परिचालन नियंत्रण मुख्य रूप से क्षेत्रीय सीमाओं के आधार पर होता था। हालांकि, पिछले 25 वर्षों में विमानन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग जैसे कुछ क्षेत्रों में कार्य-आधारित दृष्टिकोण से मिले सकारात्मक अनुभवों के आधार पर यह बदलाव पूरे बल में लागू किया जा रहा है।
कौन से सेक्टर कैसे बदले जाएंगे?
इस नई व्यवस्था के तहत कई मौजूदा सेक्टरों को उनके काम के आधार पर पुनर्गठित किया गया है। नई दिल्ली स्थित 'नेशनल कैपिटल रीजन सेक्टर' को अब 'गवर्नमेंट बिल्डिंग, म्यूजियम एंड मॉन्यूमेंट्स एंड मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम' (जीवीएमएम एंड एमआरटीएस) सेक्टर का नाम दिया गया है। इसी तरह, रांची का ईस्टर्न सेक्टर अब कोल (कोयला) सेक्टर और भिलाई का सेंट्रल सेक्टर पूरी तरह से स्टील सेक्टर के रूप में काम करेगा।
अन्य प्रमुख बदलावों में नई दिल्ली का नॉर्थ सेक्टर और कोलकाता का नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-II शामिल हैं, जिन्हें क्रमशः पावर-I और पावर-II सेक्टर बनाया गया है। वहीं, गुवाहाटी का नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सेक्टर कहलाएगा।
बंदरगाहों और हवाई अड्डों की सुरक्षा
भारत के समुद्री व्यापार ढांचे को और मजबूत करने के लिए, बंदरगाहों की सुरक्षा व्यवस्था को भी पुनर्गठित किया गया है। मुंबई के वेस्टर्न सेक्टर को 'वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर' और चेन्नई के साउथ सेक्टर को 'ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर' में बदला गया है। CISF को 'इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी' (आईएसपीएस) कोड के तहत बंदरगाह सुविधाओं के लिए 'मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन' (आरएसओ) का दर्जा भी प्राप्त है। इस बदलाव से बंदरगाह प्राधिकरणों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, तीन सेक्टर अपनी मौजूदा व्यवस्था के तहत ही काम करते रहेंगे। इनमें बेंगलुरु का परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग सेक्टर, नई दिल्ली का एयरपोर्ट सेक्टर-I, और बेंगलुरु का एयरपोर्ट सेक्टर-II शामिल हैं।
इनपुट: IANS



