मकाऊ: लोकतंत्र समर्थक पूर्व सांसद आउ काम सैन को राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में साढ़े 12 साल की जेल
मकाऊ में लोकतंत्र के एक प्रमुख चेहरे और पूर्व सांसद आउ काम सैन को राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन मामले में साढ़े 12 साल जेल की सजा सुनाई गई है। यह मकाऊ का पहला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है…
मकाऊ में लोकतंत्र के एक प्रमुख चेहरे और पूर्व सांसद आउ काम सैन को राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन मामले में साढ़े 12 साल जेल की सजा सुनाई गई है। यह मकाऊ का पहला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है, जिसकी सुनवाई बंद कमरे में की गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 69 वर्षीय आउ पर राज्य की राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ साजिश रचने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए बाहरी संगठनों से संपर्क करने का दोष साबित हुआ है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आउ काम सैन लंबे समय से विदेश में स्थित 'विरोधी संगठनों' की मदद कर रहे थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने ऐसे संगठनों के लिए तस्वीरें और जानकारियां जुटाईं, उन्हें तैयार किया और सार्वजनिक रूप से फैलाया। अदालत के मुताबिक, इन सामग्रियों में राज्य की राजनीतिक सत्ता के खिलाफ संदेश शामिल थे।
बंद कमरे में सुनवाई और 'दिखावटी मुकदमा' के आरोप
आउ काम सैन का मुकदमा सितंबर में शुरू हुआ और महज तीन दिनों में ही समाप्त हो गया। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट 'द इंडिपेंडेंट' के हवाले से बताती है कि उनकी गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत पहली सार्वजनिक कार्रवाई थी, जो 2009 में लागू हुआ था। उनके परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद से उन्हें न तो परिवार से संपर्क करने दिया गया और न ही अपनी पसंद का निजी वकील रखने की इजाजत मिली।
परिवार की मदद कर रहे संगठन 'जस्टिस एब्रॉड' के निदेशक माइकल पोलाक ने इस पूरी प्रक्रिया को 'दिखावटी मुकदमा' करार दिया है। उन्होंने कहा कि इससे मकाऊ की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा है।
कौन हैं आउ काम सैन?
पुर्तगाल और मकाऊ, दोनों की नागरिकता रखने वाले आउ काम सैन को मकाऊ के सबसे प्रमुख विपक्षी नेताओं में से एक माना जाता है। पेशे से शिक्षक रहे आउ ने लगभग 20 वर्षों तक मकाऊ की विधानसभा में सांसद के रूप में काम किया, जहाँ अधिकांश सदस्य बीजिंग समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने 2021 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वह 1989 में बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में हुए सैन्य दमन की याद में होने वाले कार्यक्रमों के मुख्य आयोजकों में भी शामिल रहे हैं।
फैसले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस फैसले ने मकाऊ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विरोध को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। मानवाधिकार संगठन 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने कहा कि यह कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राय रखने वाले लोगों के लिए एक डरावना संदेश है। संगठन की उप-एशिया निदेशक माया वांग ने कहा, "लोकतंत्र समर्थक आवाजों को दबाने की यह कोशिश चीन सरकार द्वारा असहमति और बुनियादी आजादी पर किए जा रहे व्यापक दबाव का हिस्सा दिखती है।" आलोचकों का मानना है कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग का असहमति के खिलाफ अभियान अब मकाऊ तक पहुंच गया है, जो 1999 से हांगकांग की तरह चीन का एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है।
इनपुट: IANS



