मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: पीएम मोदी के 'मन की बात' में जिक्र के बाद चिकमगलूर में एवोकाडो की खेती को मिला बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' में कर्नाटक के चिकमगलूर में हो रही एवोकाडो की खेती की सराहना के बाद इस क्षेत्र में किसानों की दिलचस्पी और बढ़ने की उम्मीद है। यह खूबसूरत हिल स्टेशन, जो…

कर्नाटक: पीएम मोदी के 'मन की बात' में जिक्र के बाद चिकमगलूर में एवोकाडो की खेती को मिला बढ़ावा
(फोटो: IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'मन की बात' में कर्नाटक के चिकमगलूर में हो रही एवोकाडो की खेती की सराहना के बाद इस क्षेत्र में किसानों की दिलचस्पी और बढ़ने की उम्मीद है। यह खूबसूरत हिल स्टेशन, जो पहले से ही कॉफी और काली मिर्च के लिए मशहूर है, अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय के एक नए स्रोत के रूप में उभर रहा है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, चिकमगलूर के किसान पारंपरिक रूप से कॉफी के बागानों पर निर्भर रहे हैं, लेकिन अब वे उन्हीं बागानों के बीच में एवोकाडो उगाकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। इस तकनीक को 'इंटरक्रॉपिंग' कहते हैं, जो पिछले कुछ महीनों में यहाँ काफी लोकप्रिय हुई है।

मन की बात में विशेष उल्लेख

अपने कार्यक्रम 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने इस विषय पर बात की। उन्होंने कहा, "कर्नाटक के चिकमगलूर में कुछ किसान भाई-बहनों ने अपने कॉफी के बागानों के बीच एवोकाडो के पौधे भी लगाए हैं। इससे उन्हें कॉफी और काली मिर्च के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है।"

पीएम मोदी ने यह भी कहा, "हम अक्सर शहरों के रेस्टोरेंट में एवोकाडो टोस्ट के बारे में सुनते हैं, लेकिन इसी एवोकाडो के जरिए हमारे नए-नए तरीके आजमाने वाले किसानों ने कमाई का एक नया जरिया खोज निकाला है।" इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन का भी उदाहरण दिया, जिन्होंने सिर्फ आधी हेक्टेयर जमीन पर एवोकाडो उगाकर अपनी आय में जबरदस्त बढ़ोतरी की।

किसानों के लिए कमाई का स्थिर जरिया

चिकमगलूर के कई किसानों ने IANS को बताया कि शहरी क्षेत्रों के होटलों और रेस्तरां में एवोकाडो से बने खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण वे इसे अपनी खेती में नियमित रूप से शामिल कर रहे हैं। एक किसान के अनुसार, कॉफी और काली मिर्च की कीमतों में अक्सर उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन एवोकाडो की खेती से आय का एक स्थिर स्रोत मिलता है।

यह नया मॉडल किसानों को 'एक बागान, कमाई के कई जरिये' का अवसर दे रहा है, और इसके लिए उन्हें अलग से जमीन की जरूरत भी नहीं पड़ रही है। हाल के वर्षों में चिकमगलूर, कलासा, बालेहोनूरु, मुडिगेरे, जयापुरा, एनआर पुरा, कोप्पा और कदूर जैसे इलाकों में एवोकाडो उगाने वाले किसानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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