मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 18 साल पुराने रिश्वत मामले में केरल सरकार ने दी जांच को हरी झंडी
केरल सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 18 साल पुराने एक मामले में भ्रष्टाचार की जांच को मंजूरी दे दी है। यह मामला साल 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग…
केरल सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 18 साल पुराने एक मामले में भ्रष्टाचार की जांच को मंजूरी दे दी है। यह मामला साल 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव हुआ करते थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन पर एक सरकारी ठेके का बिल पास करने के एवज में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।
यह कार्रवाई ठेकेदार वी.ओ. साजन की शिकायत के बाद हुई है। साजन ने आरोप लगाया था कि PWD सचिव रहते हुए ज्ञानेश कुमार ने बिलों को मंजूरी देने के लिए मलेशियाई इंजीनियर ली सी बिन से 2 करोड़ रुपये की मांग की थी। साजन उस कंपनी में सामग्री की आपूर्ति करने वाले एक उप-ठेकेदार थे। कथित तौर पर भुगतान में देरी के कारण भारी मानसिक तनाव झेल रहे ली सी बिन ने बाद में आत्महत्या कर ली थी।
जांच को मिली कानूनी मंजूरी
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बुधवार को इस फैसले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन से परामर्श के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17(ए) के तहत जांच की अनुमति दी गई है। चेन्निथला ने कहा, "मैंने मुख्यमंत्री से बात की और धारा 17(ए) के तहत जांच की मंजूरी दे दी है। विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) कानून के तहत जांच कर सकता है, और मैंने जरूरी मंजूरी दे दी है।"
पद नहीं बनेगा जांच में बाधा
गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार का मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त का पद इस जांच में कोई बाधा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा उनके वर्तमान कार्यालय से जुड़ी है, न कि PWD सचिव के रूप में उनके पिछले कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों से। रमेश चेन्निथला ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि जांच पर कोई रोक नहीं है।" उन्होंने यह भी बताया कि अब जांच को आगे कैसे बढ़ाना है, यह तय करना विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) का काम है।
इनपुट: IANS



