कर्नाटक: गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र बनाएगा उच्च-स्तरीय समिति
केंद्र सरकार ने कर्नाटक के गन्ना किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए एक उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति बनाने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह निर्णय नई दिल्ली में…
केंद्र सरकार ने कर्नाटक के गन्ना किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए एक उच्च-स्तरीय संयुक्त समिति बनाने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह निर्णय नई दिल्ली में सोमवार को केंद्रीय मंत्रियों और किसान नेताओं के बीच हुई एक अहम बैठक के बाद लिया गया। इस समिति का गठन एक हफ्ते के भीतर किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों से जुड़े विवादों का स्थायी हल निकालना है।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। इसमें किसानों ने चीनी मिलों द्वारा चीनी रिकवरी के आंकड़ों में गड़बड़ी, गन्ने के वजन में कटौती और भुगतान में देरी जैसे गंभीर आरोप लगाए। मंत्रियों ने किसानों को आश्वासन दिया कि प्रस्तावित समिति इन सभी शिकायतों की गहराई से जांच करेगी।
समिति की संरचना और कार्यप्रणाली
इस संयुक्त समिति में केंद्र, कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों के प्रतिनिधियों के अलावा किसान संगठनों, चीनी मिलों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य एक पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली बनाना है ताकि किसानों का शोषण रोका जा सके। समिति गन्ने की कटाई से लेकर वजन और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करेगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "केंद्र सरकार किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को शामिल करके एक संयुक्त व्यवस्था के जरिए चीनी रिकवरी, वजन और भुगतान से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।" उन्होंने संबंधित अधिकारियों को किसानों की चिंताओं पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए। समिति चीनी रिकवरी मापने के वैज्ञानिक मानकों, प्रयोगशाला परीक्षण और वजन करने की प्रणालियों की सटीकता की भी जांच करेगी।
बैठक के अन्य प्रमुख बिंदु
चर्चा के दौरान प्रह्लाद जोशी ने गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने की केंद्र की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और FRP के बीच का अंतर भी स्पष्ट किया। इसके अलावा, राज्य द्वारा निर्धारित मूल्य (SAP), इथेनॉल उत्पादन, कचरा प्रबंधन और फसल बीमा जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि इन सुधारों को समय पर लागू करने के लिए राज्य सरकारों का सहयोग आवश्यक है। बैठक में कर्नाटक के सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी, कृषि मंत्री नरेंद्र स्वामी, चीनी व कपड़ा मंत्री रुद्रप्पा मनप्पा लमानी, पूर्व सांसद राजू शेट्टी सहित किसान नेता और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
इनपुट: IANS



