अल नीनो का असर: सरकार 225 ज़िलों के लिए लाई विशेष योजना, नया कृषि डैशबोर्ड बनेगा किसानों का मददगार
इस साल 'अल नीनो' के कारण देश के कई हिस्सों में मानसून सामान्य नहीं रहा, जिसका सीधा असर खेती पर पड़ा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष आपातकालीन योजना तैयार की है। समाचार एजेंसी…
इस साल 'अल नीनो' के कारण देश के कई हिस्सों में मानसून सामान्य नहीं रहा, जिसका सीधा असर खेती पर पड़ा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष आपातकालीन योजना तैयार की है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह योजना देशभर के उन 225 जिलों पर केंद्रित है जहां अनियमित मानसून ने रबी फसल की बुवाई को प्रभावित किया है।
सरकार का लक्ष्य किसानों को मौजूदा रबी सीजन में बुवाई करने में हरसंभव मदद पहुंचाना है। इस प्रयास के केंद्र में एक नया 'डायनेमिक एग्रीकल्चर डैशबोर्ड' है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) विकसित कर रहा है।
क्या है यह नया कृषि डैशबोर्ड?
ICAR के महानिदेशक एमएल जाट ने पत्रकारों को बताया, “हम एक गतिशील डैशबोर्ड विकसित करके आकस्मिक योजना को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं।” यह डैशबोर्ड कोई सामान्य पोर्टल नहीं होगा, बल्कि कई अहम जानकारियों का एक एकीकृत मंच होगा।
इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- मौसम का पूर्वानुमान: इसमें भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साप्ताहिक पूर्वानुमान शामिल होंगे।
- पानी की उपलब्धता: जलाशयों और अन्य जल निकायों से जुड़े आंकड़े भी इसमें मिलेंगे।
- स्थानीय स्तर पर मदद: यह अधिकारियों को जिला-स्तर पर सटीक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने में सक्षम बनाएगा।
श्री जाट ने स्पष्ट किया कि यह डैशबोर्ड सिर्फ चिन्हित 225 जिलों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका लाभ पूरे देश को मिलेगा। यह केवल आपातकालीन स्थितियों के लिए नहीं, बल्कि सामान्य कृषि परिस्थितियों में भी सलाह देगा। ICAR का अंतिम लक्ष्य इस डैशबोर्ड को सरकार की 'एग्रीस्टैक' पहल के साथ जोड़ना है।
रबी बुवाई की मौजूदा स्थिति
आंकड़ों के अनुसार, 30 अक्टूबर तक देश में लगभग 38 लाख हेक्टेयर में ही रबी फसलों (गेहूं सहित) की बुवाई हो पाई थी। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 46 प्रतिशत कम है। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में बेमौसम बारिश के कारण बुवाई में देरी हुई है, लेकिन अब इसमें तेजी आने की उम्मीद है।
फसल विविधिकरण पर भी ज़ोर
ICAR सिर्फ तात्कालिक समस्याओं पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। महानिदेशक एमएल जाट ने बताया कि धान की कटाई के बाद खाली खेतों में तिलहन और दलहन की खेती को बढ़ावा देने के अवसर तलाशने के लिए एक कार्य बल का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा, “जिन स्थानों पर गेहूं के लिए मिट्टी में नमी अपर्याप्त है, वहां किसान उपयुक्त तिलहन और दलहन की फसलें उगाने पर विचार कर सकते हैं।” इसके अलावा, अगले दो से चार महीनों में एक अलग 'मृदा स्वास्थ्य नीति' भी लाने की योजना है, ताकि किसान पोषक तत्वों के आधार पर उर्वरकों का सही इस्तेमाल कर सकें।
इनपुट: IANS



