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तमिलनाडु: स्मार्ट सिटी मिशन में 10,000 करोड़ के फंड में हेराफेरी का आरोप, CAG रिपोर्ट पर भाजपा ने उठाए सवाल

तमिलनाडु में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्मार्ट सिटीज मिशन' योजना में भारी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगा है। भाजपा विधायक वानति श्रीनिवासन ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट का…

तमिलनाडु: स्मार्ट सिटी मिशन में 10,000 करोड़ के फंड में हेराफेरी का आरोप, CAG रिपोर्ट पर भाजपा ने उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्मार्ट सिटीज मिशन' योजना में भारी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगा है। भाजपा विधायक वानति श्रीनिवासन ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि योजना के लिए आवंटित 10,000 करोड़ रुपये के फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और गलत प्रबंधन हुआ है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, श्रीनिवासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि 2015 से 2023 के बीच हुए कामों की ऑडिट से कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य शहरों में बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना था।

काम हुए नहीं, फंड कहीं और खर्च

रिपोर्ट के निष्कर्षों का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने बताया कि 1,602.20 करोड़ रुपये की लागत वाले कुल 52 प्रोजेक्ट्स पर तो काम शुरू ही नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी मिशन के फंड का इस्तेमाल उन कार्यों के लिए किया गया, जिन्हें नगर निगमों को अपने नियमित बजट से पूरा करना था। ऐसे पांच प्रोजेक्ट्स, जिनकी कुल लागत 21.42 करोड़ रुपये थी, को मिशन के पैसे से पूरा किया गया।

नियमों की अनदेखी और फिजूलखर्ची

वानति श्रीनिवासन के अनुसार, ऑडिट में यह बात भी सामने आई है कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारियों ने नगर निगम के रोजमर्रा के कामों को स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा बताकर योजना के मूल उद्देश्य को ही कमजोर कर दिया।

रिपोर्ट में कथित तौर पर ऐसे खर्चे भी पाए गए जिन्हें मिशन के तहत मंजूरी ही नहीं मिली थी। आरोप है कि इस फंड से सरकारी दफ्तरों के लिए कार और फर्नीचर खरीदे गए और सरकारी प्रचार से जुड़े खर्च भी पूरे किए गए। श्रीनिवासन ने इसे तय नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी का पैसा तमिलनाडु सरकार के विभागों के वित्तीय खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

जवाबदेही तय करने की मांग

इन निष्कर्षों को 'चौंकाने वाला' बताते हुए श्रीनिवासन ने कहा कि यह रिपोर्ट उन दावों पर भी सवाल उठाती है जिनमें कहा जाता रहा है कि केंद्र से पर्याप्त वित्तीय मदद न मिलने से राज्य का विकास रुका है। उन्होंने तर्क दिया कि ऑडिट से साफ है कि जो पैसा मिला, उसका भी सही तरीके से या पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ। उन्होंने प्रोजेक्ट्स में देरी, फंड के गलत इस्तेमाल और मंजूर लक्ष्यों से हटकर किए गए खर्च के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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