ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के लिए बनेगा नया प्राधिकरण, अब एक ही जगह से होगी पूरे देश की प्लानिंग
देश में सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई यातायात जैसे सभी परिवहन माध्यमों के विकास की योजना अब एक ही छत के नीचे बनेगी। केंद्र सरकार ने इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स…
देश में सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई यातायात जैसे सभी परिवहन माध्यमों के विकास की योजना अब एक ही छत के नीचे बनेगी। केंद्र सरकार ने इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए 'एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण' (ITLA) के गठन को हरी झंडी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस महत्वपूर्ण फैसले पर मुहर लगाई गई।
यह नया प्राधिकरण एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle - SPV) के तौर पर काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी को दूर करना है, जिसके कारण योजनाओं में अक्सर देरी होती है और वे बिखरी हुई रहती हैं। सरकार का मानना है कि इस कदम से पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी, स्थिरता और प्रभावशीलता आएगी।
क्या करेगा यह नया प्राधिकरण?
ITLA देश में ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स प्लानिंग के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय संस्था होगी। इसकी कई अहम जिम्मेदारियां होंगी, जिनमें नीतिगत सहयोग देना, रिसर्च को बढ़ावा देना, प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करना और लागू हो चुकी योजनाओं की निगरानी करना शामिल है। बेहतर फैसले लेने के लिए यह प्राधिकरण डेटा एनालिटिक्स का भी इस्तेमाल करेगा।
प्राधिकरण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 10 साल या उससे अधिक की अवधि के लिए एक व्यापक 'राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान' तैयार करना होगी। इस मास्टर प्लान में परिवहन के सभी मुख्य साधन जैसे - सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जहाजरानी, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग, तटीय शिपिंग और शहरी परिवहन शामिल होंगे। यह प्राधिकरण विभिन्न मंत्रालयों द्वारा तैयार की गई छोटी अवधि की योजनाओं की भी समीक्षा करेगा ताकि वे राष्ट्रीय रणनीति के अनुरूप हों।
बड़े प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन और निगरानी
एक और महत्वपूर्ण काम के तहत, ITLA केंद्र सरकार के 500 करोड़ रुपए या उससे अधिक लागत वाले सभी परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का तकनीकी मूल्यांकन करेगा। हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स का वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगा। इसके अलावा, प्राधिकरण 500 करोड़ से ज्यादा लागत वाली परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर नजर रखेगा और किसी भी समस्या के समाधान के लिए एक समन्वित मंच के रूप में काम करेगा। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद उसके असर का आकलन भी यही प्राधिकरण करेगा।
इनपुट: IANS



