तेलंगाना सरकार की नाश्ता योजना: 27 लाख छात्रों को लाभ, उपमुख्यमंत्री ने बताया 'विश्व की सबसे बड़ी पहल'
तेलंगाना सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी नाश्ता योजना को दुनिया की सबसे बड़ी पहल बताया है, जिसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 27 लाख छात्रों को पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है…
तेलंगाना सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी नाश्ता योजना को दुनिया की सबसे बड़ी पहल बताया है, जिसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 27 लाख छात्रों को पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस कार्यक्रम को राज्य के भविष्य में एक महत्वपूर्ण निवेश करार दिया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को दिया जा रहा यह भोजन कोई मुफ्त की सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य के मानव संसाधनों को तैयार करने का एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे स्वस्थ रहेंगे और अच्छी पढ़ाई करेंगे, तभी वे राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।
एक ही रसोई से 60,000 छात्रों का नाश्ता
इस योजना को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे का निर्माण किया जा रहा है। इसी कड़ी में, उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क और सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने सूर्यापेट जिले के मुनगला गाँव में एक केंद्रीकृत सामुदायिक रसोई की आधारशिला रखी। 9.6 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह आधुनिक रसोई स्वच्छता और नई तकनीक से लैस होगी। इसके माध्यम से एक ही स्थान से 1,020 स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 60,000 छात्रों को गर्म नाश्ता पहुँचाया जाएगा।
क्या है नाश्ते का मेन्यू?
इस योजना के तहत, सप्ताह में छह दिन छात्रों को नाश्ता दिया जा रहा है। मेन्यू में पोषण का विशेष ध्यान रखा गया है, जिसमें तीन दिन दूध और बाकी तीन दिन रागी का दलिया परोसा जा रहा है। उपमुख्यमंत्री ने कहा, "घर में 100 लोगों के लिए भी खाना बनाना मुश्किल होता है, ऐसे में 27 लाख छात्रों को एक साथ नाश्ता उपलब्ध कराना एक ऐसी पहल है जो दुनिया में कहीं और नहीं है और यह तेलंगाना सरकार के मानवीय दृष्टिकोण का प्रतीक है।"
'कल्याणकारी कार्यक्रम मुफ्त नहीं, निवेश हैं'
वित्त विभाग का भी कार्यभार संभाल रहे विक्रमार्क ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा गरीबों, किसानों, महिलाओं और छात्रों पर किया गया खर्च एक निवेश है। उन्होंने कहा कि बच्चों को उनके शुरुआती वर्षों में पर्याप्त पोषण देकर ही उन्हें स्वस्थ मानव संसाधन बनाया जा सकता है। सरकार ने यह ज़िम्मेदारी ली है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिले ताकि वे जीवन में ऊँचे मुकाम तक पहुँच सकें।
इनपुट: IANS



