ब्राजील: राष्ट्रपति चुनाव हारे फ्लेवियो बोल्सोनारो के देश छोड़ने पर रोक, पासपोर्ट जमा करने का आदेश
ब्राजील के सुप्रीम फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति चुनाव में हार का सामना करने वाले उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सोनारो को अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उनके देश छोड़कर जाने पर भी…
ब्राजील के सुप्रीम फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति चुनाव में हार का सामना करने वाले उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सोनारो को अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उनके देश छोड़कर जाने पर भी रोक लगा दी है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई खबरों के मुताबिक, यह आदेश एक गोपनीय जांच के सिलसिले में दिया गया है।
यह पूरा मामला धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और अवैध विदेशी मुद्रा लेनदेन के आरोपों से जुड़ा है, जिसकी जांच संघीय पुलिस कर रही है। समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि इस जांच के दायरे में बोल्सोनारो के साथ उनके वकील विलर टोमाज भी हैं। सुप्रीम फेडरल कोर्ट के न्यायाधीश एलेक्जेंडर डी मोरेस ने अपने आदेश में बोल्सोनारो को वकील टोमाज से संपर्क करने से भी मना किया है।
चुनाव नतीजों को मानने से इनकार
रविवार को आए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे और अंतिम दौर के नतीजों में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को विजेता घोषित किया गया। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट द्वारा सभी वोटों की गिनती पूरी होने के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार, लूला दा सिल्वा को 51.79% वैध वोट मिले, जबकि फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.21% मतों से संतोष करना पड़ा।
हालांकि, बोल्सोनारो ने इन नतीजों को स्वीकार करने को 'असंभव' बताते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान का समय बढ़ाने के फैसले के कारण सभी मतदाताओं के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम इन परिणामों को अदालत में चुनौती देगी।
क्या था मतदान समय का विवाद?
दरअसल, रविवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने भारी बारिश और सार्वजनिक परिवहन में बाधाओं को देखते हुए देश भर के मतदान केंद्रों पर वोटिंग का समय दो घंटे बढ़ा दिया था। यह फैसला सिर्फ उन मतदान केंद्रों पर लागू हुआ जो आदेश आने के समय खुले थे। जो केंद्र पहले ही बंद हो गए थे, उन्हें दोबारा नहीं खोला गया। बोल्सोनारो का तर्क है कि इससे उन इलाकों के मतदाता प्रभावित हुए, जहां मतदान केंद्र दोबारा नहीं खुले।
उल्लेखनीय है कि 4 अक्टूबर को हुए चुनाव के पहले चरण में बोल्सोनारो ने लगभग 47% वोट पाकर बढ़त बनाई थी, जबकि लूला दा सिल्वा को करीब 45% वोट मिले थे। लेकिन ब्राजील के चुनावी नियमों के तहत किसी भी उम्मीदवार को 50% से अधिक वोट न मिलने पर शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मुकाबला होता है, जिसमें लूला दा सिल्वा ने जीत दर्ज की।
इनपुट: IANS



