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टाटा संस: एन. चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति पर विवाद, टाटा ट्रस्ट्स ने बताया 'गैरकानूनी'

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को 'गैर-कानूनी' करार देते हुए अपनी कड़ी आपत्ति…

टाटा संस: एन. चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति पर विवाद, टाटा ट्रस्ट्स ने बताया 'गैरकानूनी'
(फोटो: IANS)

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को 'गैर-कानूनी' करार देते हुए अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर और चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, जिससे पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठ गए हैं।

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टाटा ट्रस्ट्स की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में साफ कहा गया है कि चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति से जुड़ा कोई भी प्रस्ताव तब तक वैध नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसे ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर्स का बहुमत प्राप्त न हो। इस मामले में, बोर्ड मीटिंग में चार निदेशकों ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के पक्ष में मतदान किया, जबकि नोएल टाटा ने इसका विरोध किया।

कानूनी आधार पर चुनौती

ट्रस्ट्स ने टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' (कंपनी के आंतरिक नियम) का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से अमान्य बताया है। बयान में कहा गया, "चूंकि ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टरों में से एक, नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, इसलिए यह प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य और बिना किसी आधार के हो गया।"

मामले को और पुख्ता करने के लिए नोएल एन. टाटा ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. डी.वाई. चंद्रचूड़ से ली गई एक कानूनी राय भी बोर्ड के सामने पेश की, जिसमें ट्रस्ट्स के पक्ष को सही ठहराया गया है। ट्रस्ट्स का यह भी कहना है कि चेयरमैन की नियुक्ति पर विचार करने के लिए बोर्ड की बैठक तभी कानूनी रूप से बुलाई जा सकती है, जब उसके दोनों नॉमिनी डायरेक्टर मौजूद हों।

RBI के निर्देश के बाद आया फैसला

यह घटनाक्रम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस निर्देश के कुछ हफ्तों बाद हुआ है, जिसमें टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्टिंग) होने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए कहा गया था। गौरतलब है कि आरबीआई ने 2022 में टाटा संस को एक 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी' के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी के लिए तीन साल के भीतर लिस्ट होना अनिवार्य है।

इनपुट: IANS

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