मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

मतदाता सूची विवाद: नवीन पटनायक के निर्देश पर बीजेडी विपक्षी दलों के विरोध मार्च में होगी शामिल

ओडिशा के प्रमुख विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने एक अहम राजनीतिक कदम उठाते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के विरोध मार्च में शामिल होने का फैसला किया है…

मतदाता सूची विवाद: नवीन पटनायक के निर्देश पर बीजेडी विपक्षी दलों के विरोध मार्च में होगी शामिल
(फोटो: IANS)

ओडिशा के प्रमुख विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) ने एक अहम राजनीतिक कदम उठाते हुए मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के विरोध मार्च में शामिल होने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीजेडी प्रमुख और नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक के निर्देश पर पार्टी के सांसद नई दिल्ली में मंगलवार को होने वाले इस प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे। यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कथित मनमाने फैसलों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।

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यह पूरा विवाद मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया और इसके तहत देश भर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़ा है। बीजेडी पहले ही इस प्रक्रिया में सीईसी ज्ञानेश कुमार की विवादास्पद भूमिका को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर चुकी है।

गड़बड़ियों के आरोप और चिंताएँ

बीजेडी संसदीय दल (राज्यसभा) के नेता मानस मंगराज ने मंगलवार को बताया कि अकेले ओडिशा में ही एसआईआर के नाम पर 20 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। उन्होंने धमनगर की एक घटना का विशेष उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां एक खास इलाके से अल्पसंख्यक समुदाय के 227 वोट कथित तौर पर संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की जानकारी के बिना ही हटा दिए गए।

मंगराज के अनुसार, यह घटना एसआईआर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी कहा कि अकेले धमनगर विधानसभा क्षेत्र में ही हजारों मतदाताओं के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं।

चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट

इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की। राज्यसभा सदस्य मंगराज ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों ने चुनाव आयोग के पहले के निर्देशों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक, अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया था, जबकि चुनाव आयोग ने पहले कुछ और ही संकेत दिया था। इस घटनाक्रम से मतदाता सूची में कथित हेरफेर में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन देने से भी चिंताएं बढ़ी हैं।

राजनीतिक रूप से बीजेडी ने अब तक 'इंडिया' गठबंधन और एनडीए, दोनों से समान दूरी बनाए रखी है। हालांकि, इस मुद्दे पर पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है, "लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध एक जिम्मेदार राजनीतिक दल के तौर पर बीजेडी आज के कार्यक्रम में हिस्सा लेगी।"

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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