पश्चिम बंगाल: कारोबार को आसान बनाने और निवेश खींचने के लिए गुरुवार को आएगी नई औद्योगिक नीति
पश्चिम बंगाल में निवेश का माहौल बेहतर बनाने और उद्यमियों के लिए कारोबार की राह आसान करने के मकसद से राज्य सरकार गुरुवार को अपनी नई औद्योगिक नीति जारी करेगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी इसकी औपचारिक…
पश्चिम बंगाल में निवेश का माहौल बेहतर बनाने और उद्यमियों के लिए कारोबार की राह आसान करने के मकसद से राज्य सरकार गुरुवार को अपनी नई औद्योगिक नीति जारी करेगी। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी इसकी औपचारिक घोषणा करेंगे। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस नीति का मुख्य जोर 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' यानी व्यापार करने में सुगमता बढ़ाने पर होगा, जिसके लिए सरकारी नियमों को सरल बनाया जाएगा और निवेश प्रस्तावों को जल्द मंजूरी दी जाएगी।
राज्य मंत्रिमंडल ने इस औद्योगिक नीति के मसौदे को 28 अक्टूबर को ही अपनी मंजूरी दे दी थी। अब गुरुवार दोपहर को राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद इसे अंतिम रूप से घोषित किया जाएगा। यह नीति इस साल मई में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद सुवेंदु अधिकारी द्वारा किए गए उस वादे का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने राज्य में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए एक व्यापक नीति लाने की बात कही थी।
निवेशकों के लिए प्रोत्साहन और संतुलन
नई नीति में निवेशकों के लिए प्रोत्साहन योजना को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव है। पिछली ममता बनर्जी सरकार के दौरान इस तरह की नीति को खत्म कर दिया गया था, लेकिन अब इसे एक अधिक व्यवस्थित और व्यापक स्वरूप में वापस लाया जा रहा है। सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि इसका मसौदा औद्योगिक रूप से विकसित राज्यों की नीतियों का अध्ययन करके तैयार किया गया है।
प्रोत्साहनों के तहत पिछड़े इलाकों में निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि औद्योगिक विकास का फायदा उस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़ सके। इसमें परियोजना के शुरुआती सालों में बिजली शुल्क में छूट, कर्ज पर ब्याज का एक हिस्सा सरकार द्वारा वहन करना और कर्मचारियों के पीएफ में कंपनी के योगदान की भरपाई जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार हुई नीति
इस नीति का मसौदा मंत्रियों के एक समूह ने तैयार किया है, जिसमें उद्योगपतियों, उद्योग संघों और आर्थिक विशेषज्ञों से भी सलाह ली गई। पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने निवेशकों के हितों, रोजगार सृजन और जमीन मालिकों जैसे अन्य हितधारकों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है, जिस वजह से इसकी घोषणा में कुछ देरी हुई। पहले इसे 15 अगस्त को ही जारी किया जाना था, लेकिन समय-सीमा को कई बार आगे बढ़ाया गया।
इनपुट: IANS



