बांग्लादेश: सत्ता बदलने के बाद भी राजनीतिक हिंसा का दौर जारी, रिपोर्ट ने खोली चिंताजनक तस्वीर
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद भी जमीनी स्तर पर हिंसा का सिलसिला थम नहीं रहा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन के अंत से एक नई राजनीतिक संस्कृति की उम्मीद…
बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद भी जमीनी स्तर पर हिंसा का सिलसिला थम नहीं रहा है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन के अंत से एक नई राजनीतिक संस्कृति की उम्मीद जगी थी, लेकिन हालिया घटनाओं से पता चलता है कि स्थानीय प्रभाव और संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर पुरानी प्रतिद्वंद्विता अब भी कायम है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह हिंसा सत्तारूढ़ दलों के भीतर भी देखने को मिल रही है।
यह विश्लेषण 'द डिप्लोमैट' में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें बांग्लादेश के मानवाधिकार संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' (ASK) के आंकड़ों, अकादमिक शोध और मीडिया रिपोर्टों का उपयोग किया गया है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि देश में सरकारें बदलती रही हैं, लेकिन राजनीतिक झड़पों की प्रकृति काफी हद तक वैसी ही बनी हुई है।
हाल की हिंसक घटनाएं
इस हिंसा का एक उदाहरण 18 अक्टूबर को नारायणगंज जिले के पैस्का इलाके में देखने को मिला। यहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की युवा शाखा 'जुबो दल' के स्थानीय नेता रिपन मियां पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। स्थानीय बीएनपी कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह विवाद एक धार्मिक कार्यक्रम की मेहमान सूची में नाम शामिल करने को लेकर शुरू हुआ था। वहीं, एक अन्य घटना 28 फरवरी को चुआडांगा जिले में हुई, जहां BNP और जमात-ए-इस्लामी (JI) समर्थकों के बीच झड़प में दो भाइयों की जान चली गई। पुलिस ने बताया कि इफ्तार के बाद शुरू हुई बहस खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई।
चिंताजनक आंकड़े
ASK द्वारा जुटाए गए आंकड़े समस्या की गंभीरता को उजागर करते हैं। संगठन ने सिर्फ जनवरी से सितंबर 2026 के बीच राजनीतिक हिंसा की 467 घटनाएं दर्ज कीं, जिनमें 94 लोगों की मौत हो गई और 3,587 लोग घायल हुए। चिंता की बात यह है कि इनमें से 112 घटनाएं सत्तारूढ़ BNP के आंतरिक गुटों के बीच हुईं, जिसमें 18 मौतें और 1,215 घायल हुए। ये आंकड़े तारिक रहमान के 17 फरवरी को प्रधानमंत्री बनने के बाद की अवधि को भी शामिल करते हैं।
हिंसा का पुराना पैटर्न
रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई नई प्रवृत्ति नहीं है। 2002 से 2006 के बीच जब BNP सत्ता में थी, तब पार्टी के भीतर 284 झड़पों में 55 मौतें हुईं। वहीं, जब 2009 में अवामी लीग (AL) सत्ता में आई, तो 2009 से 2012 के बीच पार्टी के अंदरूनी संघर्षों में 97 लोगों की जान गई। स्थानीय चुनावों, विशेषकर यूनियन परिषद चुनावों के दौरान भी हिंसा चरम पर होती है। आंकड़ों के अनुसार, चुनावी हिंसा में 2016 में 147 और 2021 में 113 लोगों की मौत हुई।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बांग्लादेश में राजनीतिक दलों के भीतर वर्चस्व की लड़ाई, सरकारी ठेकों, जमीन-जायदाद और रोजगार पर नियंत्रण जैसे विवाद हिंसा के मुख्य कारण हैं। सत्ता परिवर्तन के बावजूद ये स्थानीय प्रतिद्वंद्विताएं खत्म नहीं हुई हैं, जो देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इनपुट: IANS



