शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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त्रिपुरा: सुरक्षाबलों ने ₹25 लाख का गांजा जब्त किया, तस्कर वाहन छोड़कर फरार

त्रिपुरा में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई हुई है, जिसमें सुरक्षाबलों ने 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीम…

त्रिपुरा: सुरक्षाबलों ने ₹25 लाख का गांजा जब्त किया, तस्कर वाहन छोड़कर फरार
(फोटो: IANS)

त्रिपुरा में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई हुई है, जिसमें सुरक्षाबलों ने 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत लगभग 25 लाख रुपए आंकी गई है। यह ऑपरेशन असम राइफल्स और कस्टम विभाग ने मिलकर खोवाई जिले में अंजाम दिया।

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रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह संयुक्त अभियान गुरुवार शाम को एक खुफिया सूचना के आधार पर चलाया गया था। टीम ने पश्चिम सोनातला से एक संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया। यह पीछा पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिले की सीमा पर स्थित हेजामारा ब्लॉक से 18 किलोमीटर पहले बैखुंतपुर गांव में जाकर खत्म हुआ। हालांकि, वाहन का चालक मौके से भागने में कामयाब रहा।

लगातार हो रही है कार्रवाई

अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जब्त की गई प्रतिबंधित सामग्री को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए कस्टम अधिकारियों को सौंप दिया गया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह बरामदगी पूर्वोत्तर में सक्रिय नशीले पदार्थों के तस्करी नेटवर्क को बाधित करने के लिए असम राइफल्स और सहयोगी एजेंसियों के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

यह हाल के दिनों में इस तरह की दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 6 अक्टूबर को भी असम राइफल्स और कस्टम अधिकारियों ने खोवाई जिले से ही लगभग 1.74 करोड़ रुपए मूल्य का 340 किलोग्राम गांजा जब्त किया था।

गांजे की खेती और तस्करी का नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स और त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) मिलकर अक्सर अवैध गांजे की खेती को नष्ट करते हैं, खासकर बांग्लादेश की सीमा से लगे सेपाहिजाला जिले में। एक अधिकारी के मुताबिक, त्रिपुरा में उगाया जाने वाला गांजा स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में तस्करी कर भेजा जाता है, जहाँ इसकी कीमत बहुत ज़्यादा मिलती है।

स्थानीय निवासी, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, अपनी आजीविका के लिए पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में गांजे की खेती करने का दावा करते हैं। कई बार यह भी पाया गया है कि वन भूमि और अन्य सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के तहत गांजे की खेती, बिक्री, खरीद या सेवन अवैध है, जिसके लिए भारी जुर्माना और 20 साल तक की कैद हो सकती है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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