सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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असम में बेदखली: वन मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए सरकारी कार्रवाई का किया बचाव

असम के वन मंत्री जयंता मल्लबरुआ ने नागांव जिले के लुटुमारी आरक्षित वन में हाल ही में हुई बेदखली की कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने इस अभियान पर बांग्लादेश द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज…

असम में बेदखली: वन मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए सरकारी कार्रवाई का किया बचाव
(फोटो: IANS)

असम के वन मंत्री जयंता मल्लबरुआ ने नागांव जिले के लुटुमारी आरक्षित वन में हाल ही में हुई बेदखली की कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया है। उन्होंने इस अभियान पर बांग्लादेश द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से कानून और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी धार्मिक या सामाजिक समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अधिसूचित वन भूमि को वापस लेना और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा करना है।

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यह प्रतिक्रिया बांग्लादेश द्वारा असम में बेदखली अभियान और घरों को गिराए जाने पर जताई गई चिंताओं के बाद आई है, जिसमें इसे एक विशेष धार्मिक समुदाय को लक्षित करने वाला कदम बताया गया था।

कानूनी प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

जयंता मल्लबरुआ ने बताया कि यह अभियान 17 और 18 अक्टूबर को चलाया गया, जिसके तहत 314 हेक्टेयर अधिसूचित वन भूमि को खाली कराया गया। इस कार्रवाई से कुल 563 परिवार विस्थापित हुए। उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए 10 फरवरी 2026 (संभावित रूप से 2016) के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का उल्लेख किया, जिसमें असम के अधिसूचित वन क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका (सिविल) को सर्वोच्च न्यायालय ने 2 सितंबर, 2026 (संभावित रूप से 2016) को निपटा दिया था।

अभियान का विवरण और मानवीय पहलू

मंत्री के अनुसार, प्रशासन ने निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया। प्रभावित परिवारों को कार्रवाई शुरू होने से पहले अपने घर खाली करने और सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह अभियान बरसात के मौसम के बाद और पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें किसी भी तरह के बल प्रयोग या प्रतिरोध की कोई घटना सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि सरकार सभी समुदायों का सम्मान करती है और बेदखली के दौरान परिवारों को हुई कठिनाइयों को समझती है, लेकिन कानून का शासन सर्वोपरि है।

पर्यावरणीय उद्देश्य

मल्लबरुआ ने इस अभियान के पीछे के पर्यावरणीय कारणों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खाली कराई गई जमीन पर स्थानीय प्रजातियों के पेड़ लगाए जाएंगे। इसका मुख्य लक्ष्य वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के आवासों को पुनर्जीवित करना है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष को कम करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरक्षित वनों की सुरक्षा एक वैधानिक दायित्व और पारिस्थितिक आवश्यकता दोनों है।

इनपुट: IANS

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