बुधवार, 23 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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एशियाई विकास बैंक ने बढ़ाया भारत का ग्रोथ अनुमान, FY27 में 7% की दर से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अपना भरोसा जताते हुए इसके विकास दर के अनुमानों को बेहतर किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ADB ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी…

एशियाई विकास बैंक ने बढ़ाया भारत का ग्रोथ अनुमान, FY27 में 7% की दर से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था
(फोटो: IANS)

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अपना भरोसा जताते हुए इसके विकास दर के अनुमानों को बेहतर किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ADB ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया है। यह बैंक के पिछले 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक यानी 0.40 प्रतिशत अधिक है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के इस मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के पीछे सरकारी निवेश में आई तेजी और निर्यात में ठोस वृद्धि जैसे प्रमुख कारक हैं। भारत की इस सकारात्मक स्थिति का असर पूरे दक्षिण एशिया के आंकड़ों पर भी दिखा है, जिसके लिए इस साल की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नरमी, लेकिन भारत मज़बूत

हालांकि, ADB की 'एशियन डेवलपमेंट आउटलुक' रिपोर्ट बताती है कि पूरे विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर में कुछ नरमी आ सकती है। इस साल यह 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2025 के 5.5 प्रतिशत से कम है। इसके बाद, वित्त वर्ष 2027-28 में यह मामूली रूप से सुधरकर 5.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ADB के अनुसार, मजबूत निवेश, सरकारी प्रोत्साहन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े वैश्विक निवेश से बढ़े टेक्नोलॉजी निर्यात भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।

अर्थव्यवस्था के सामने जोखिम और चुनौतियां

एडीबी के अध्यक्ष मासातो कांडा ने कहा, “क्षेत्र लचीला बना हुआ है, लेकिन जोखिम बढ़ रहे हैं।” उन्होंने दो बड़े जोखिमों की ओर इशारा किया है। पहला, मध्य पूर्व में संघर्ष का विस्तार और रूस-यूक्रेन युद्ध का तेज होना। इससे वैश्विक ऊर्जा की कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी रह सकती हैं, जिसका असर अन्य वस्तुओं पर भी पड़ सकता है।

दूसरा प्रमुख जोखिम अल नीनो का प्रभाव है। इसके 2027 की पहली तिमाही तक बने रहने की आशंका है, जिससे फसल उत्पादन कम हो सकता है और जलविद्युत उत्पादन घट सकता है। इससे खाद्य और ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर कमजोर वर्गों पर पड़ेगा। कांडा ने कहा कि ऐसे में सरकारों के लिए प्रभावित लोगों की सुरक्षा करना महत्वपूर्ण हो जाता है और एडीबी इन प्रयासों का मजबूती से समर्थन कर रहा है।

इनपुट: IANS

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