बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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असम-अरुणाचल सीमा विवाद: 123 में से कई गांवों पर सहमति, समाधान की ओर बढ़ रहे दोनों राज्य

अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी प्रगति हुई है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बुधवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के…

असम-अरुणाचल सीमा विवाद: 123 में से कई गांवों पर सहमति, समाधान की ओर बढ़ रहे दोनों राज्य
(फोटो: IANS)

अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी प्रगति हुई है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बुधवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित 123 गांवों से जुड़े विवादों को काफी हद तक सुलझा लिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पापुम पारे जिले के 32 विवादित क्षेत्रों में से 31 का समाधान क्षेत्रीय समितियों के हालिया संयुक्त दौरों के बाद हो गया है।

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असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच 804 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा है, और दोनों सरकारें लंबे समय से चले आ रहे इन सीमा विवादों को खत्म करने के लिए प्रयासरत हैं।

सांस्कृतिक संरक्षण और अन्य मुद्दे

नाहरलागुन के पास ताराजुली में गालो हेरिटेज सेंटर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री खांडू ने कहा कि चकमा मुद्दे जैसे अन्य लंबित मामलों को सुलझाने की कोशिशें भी जारी हैं और समय आने पर लोगों को इस बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्होंने डोनी पोलो बहुउद्देशीय हॉल का उद्घाटन करते हुए इसे सामुदायिक भागीदारी और सांस्कृतिक संकल्प का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार केवल नीति के माध्यम से मदद कर सकती है, लेकिन समुदायों को स्वयं अपनी विरासत को संरक्षित करना होगा और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। उन्होंने चेताया कि राष्ट्रीय स्तर पर अरुणाचल की आदिवासी आबादी कम है, और भाषा व परंपरा के लुप्त होने से उनकी पहचान खतरे में पड़ सकती है।

युवाओं के लिए कौशल विकास का आह्वान

मुख्यमंत्री ने राज्य के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने निर्माण, बिजली और प्लंबिंग जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने का आह्वान किया, ताकि बाहरी कुशल श्रमिकों पर राज्य की निर्भरता कम हो सके। उन्होंने हैदराबाद के राष्ट्रीय कौशल केंद्र में भेजे गए 50 युवाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने पासीघाट में एक परियोजना को केवल 10 लाख रुपए में पूरा किया, जबकि बाहरी टीम ने उसी काम के लिए 18 लाख रुपए का प्रस्ताव दिया था। खांडू ने समाज से श्रम का सम्मान करने का आग्रह किया, जैसा कि विकसित देशों में होता है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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