शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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मिजोरम में नशे का कहर: हर साल लगभग 50 लोगों की जान ले रहा ड्रग्स, युवा भी चपेट में

मिजोरम में नशीली दवाओं का दुरुपयोग एक गंभीर संकट बन चुका है, जिसके चलते राज्य में हर साल औसतन 50 लोगों की मौत हो रही है। यह चिंताजनक जानकारी एक जागरूकता अभियान के दौरान सामने आई, जिसमें बताया गया कि…

मिजोरम में नशे का कहर: हर साल लगभग 50 लोगों की जान ले रहा ड्रग्स, युवा भी चपेट में
(फोटो: IANS)

मिजोरम में नशीली दवाओं का दुरुपयोग एक गंभीर संकट बन चुका है, जिसके चलते राज्य में हर साल औसतन 50 लोगों की मौत हो रही है। यह चिंताजनक जानकारी एक जागरूकता अभियान के दौरान सामने आई, जिसमें बताया गया कि 1984 से लेकर इस साल 7 अक्टूबर तक ड्रग्स के कारण कुल 2,051 लोगों की जान जा चुकी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मरने वालों में 1,799 पुरुष और 252 महिलाएं शामिल हैं, जो इस समस्या की भयावहता को दर्शाता है।

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यह समस्या अब राज्य के किशोरों को भी अपनी चपेट में ले रही है। मिजोरम आबकारी एवं मादक पदार्थ विभाग (END) के संयुक्त आयुक्त, पीटर जोहमिंगथांगा ने 2022 के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि 10 से 14 साल की उम्र के स्कूली बच्चे भी गांजे का सेवन शुरू कर चुके हैं। उन्होंने राज्य सरकार और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा इस खतरे से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

नशे की मांग और तस्करी का गलियारा

कार्यक्रम में बोलते हुए, राज्य के आबकारी एवं मादक पदार्थ मंत्री लालनघिंगलोवा हमार ने कहा कि मादक पदार्थों की ऊंची मांग और खपत ही इसके फैलाव का एक मुख्य कारण है। उन्होंने विशेष रूप से छात्रों से नशे से दूर रहने और एक स्वस्थ जीवन जीने की अपील की।

भौगोलिक स्थिति भी मिजोरम के लिए एक बड़ी चुनौती है। म्यांमार के साथ राज्य की लंबी और खुली सीमा, और दुनिया के सबसे बड़े ड्रग्स उत्पादक क्षेत्रों में से एक 'स्वर्ण त्रिभुज' (Golden Triangle) से निकटता, इसे नशीली दवाओं की तस्करी का एक प्रमुख गलियारा बनाती है। मिजोरम और मणिपुर मिलकर म्यांमार के साथ 910 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं, जिसका अधिकांश हिस्सा बिना बाड़ के है, जिससे तस्करी आसान हो जाती है।

विकसित भारत के लिए नशामुक्ति ज़रूरी

पूर्वोत्तर परिषद (NEC) के सचिव, सतिंदर कुमार भल्ला ने अपने गृह राज्य पंजाब में ड्रग्स की गंभीर चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना है, तो लोगों को नशीली दवाओं को त्यागना होगा। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र के विकास में अपनी ऊर्जा लगाने और ऐसे कौशल हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया जिससे वे रोजगार पैदा कर सकें।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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