अरावली का भविष्य: सुप्रीम कोर्ट की समिति दक्षिणी राजस्थान में खनन और वन क्षेत्रों का करेगी दौरा
अरावली पर्वत श्रृंखला की पारिस्थितिकी और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक उच्चाधिकार समिति (HPC) 11 से 13 अक्टूबर तक राजस्थान के दक्षिणी…
अरावली पर्वत श्रृंखला की पारिस्थितिकी और संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक उच्चाधिकार समिति (HPC) 11 से 13 अक्टूबर तक राजस्थान के दक्षिणी क्षेत्र का दौरा करेगी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह समिति डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में खनन, वन और भूमि उपयोग की जमीनी हकीकतों का आकलन करेगी, जिसका सीधा असर स्थानीय समुदायों, विशेषकर आदिवासी आबादी की आजीविका पर पड़ता है।
यह दौरा समिति के 8 से 10 अक्टूबर तक के गुजरात दौरे के ठीक बाद हो रहा है। समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 30 नवंबर, 2024 तक सुप्रीम कोर्ट को सौंपनी है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अरावली की परिभाषा, उसकी पारिस्थितिक स्थिति और संरक्षण के तरीकों की स्वतंत्र रूप से जांच करना है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई, 2024 के अपने एक आदेश में निर्देशित किया था।
समिति का गठन और उद्देश्य
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) के महानिदेशक की अध्यक्षता में इस पांच सदस्यीय उच्चाधिकार समिति का गठन किया था। समिति को अरावली रेंज की पूर्व-निर्धारित परिभाषा और उसके आधार पर पहाड़ियों के सीमांकन की प्रक्रिया की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इसका लक्ष्य क्षेत्र की पारिस्थितिक विशेषताओं का मूल्यांकन करना और संरक्षण से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना है।
निरीक्षण का कार्यक्रम और फोकस
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, समिति 11 अक्टूबर को डूंगरपुर जिले के पालदेवल-सरकान क्षेत्र और 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा जिले के केवड़िया-कोठारा क्षेत्र का निरीक्षण करेगी। राजस्थान सरकार ने इस दौरे के लिए वन विभाग और स्थानीय अधिकारियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। समिति के साथ डूंगरपुर और बांसवाड़ा के उप वन संरक्षक (DCF) और अन्य क्षेत्रीय कर्मचारी भी मौजूद रहेंगे ताकि निरीक्षण सुचारू रूप से हो सके।
हितधारकों से सीधा संवाद
सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर को जारी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि समिति को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों सहित सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका देना होगा। इसी के तहत समिति जमीनी निरीक्षण के अलावा स्थानीय निवासियों, पर्यावरणविदों, खनन पट्टेदारों, किसानों, मजदूरों और आदिवासी समुदायों से सीधे बातचीत करेगी। दोनों जिलों में शाम को परामर्श सत्र भी आयोजित किए जाएंगे ताकि उनकी राय और चिंताओं को रिपोर्ट में शामिल किया जा सके।
इनपुट: IANS



