इलाहाबाद हाईकोर्ट: हत्या के दोषी BJP कार्यकर्ता की सजा पर रोक, कहा - आम आदमी की आजीविका भी अहम
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2017 के एक हत्या मामले में अहम टिप्पणी करते हुए दोषी नंदलाल उर्फ बबलू राय की सज़ा और दोषसिद्धि पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि किसी आम आदमी की आजीविका का अधिकार, एक…
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2017 के एक हत्या मामले में अहम टिप्पणी करते हुए दोषी नंदलाल उर्फ बबलू राय की सज़ा और दोषसिद्धि पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि किसी आम आदमी की आजीविका का अधिकार, एक राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 5 अक्टूबर को दिए गए इस आदेश में न्यायालय ने बबलू राय की जमानत भी मंजूर कर ली, जिन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
बबलू राय, जो खुद को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सक्रिय कार्यकर्ता बताते हैं, ने अदालत में अपनी याचिका के दौरान 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि वे या तो स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर या संभव हुआ तो भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं।
न्यायालय ने क्यों दी राहत?
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि 2026 में दायर इस अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई की संभावना नहीं है। इसलिए, कार्यवाही लंबित रहने के दौरान दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाना उचित है। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के अफजल अंसारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) मामले का हवाला देते हुए कहा कि कई मौकों पर शीर्ष अदालत ने जन प्रतिनिधियों की दोषसिद्धि पर रोक लगाई है, क्योंकि इसका उनकी चुनाव लड़ने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अदालत ने आगे कहा कि इसी तर्क के आधार पर अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए ताकि वह अपील पर अंतिम निर्णय आने तक अपनी आजीविका चला सके।
जमानत के साथ लगाई गईं शर्तें
अदालत ने बबलू राय को कुछ शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है। उन्हें संबंधित अदालत में एक व्यक्तिगत मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने होंगे। इसके अलावा, जमानत पर रहते हुए वह अदालत की अनुमति के बिना अपने नाम की कोई भी अचल संपत्ति बेच या हस्तांतरित नहीं कर सकते। उन्हें रिहाई के एक महीने के भीतर जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि भी जमा करनी होगी, जबकि शेष राशि अपील लंबित रहने तक निलंबित रहेगी।
क्या था हत्या का मामला?
यह मामला मुखबिर के पिता की हत्या से जुड़ा है, जिन्हें शाम करीब 7:30 बजे बाजार से घर लौटते समय गोली मार दी गई थी। राय के वकील ने अपनी दलील में कहा था कि उनका नाम प्राथमिकी (FIR) में नहीं था और घटना के लगभग 17 दिन बाद मामले में उनकी कथित संलिप्तता सामने आई थी।
इनपुट: IANS



