शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

केरल: भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पिनाराई विजयन और परिवार, अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी उम्मीदें

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) के दिग्गज नेता पिनाराई विजयन और उनका परिवार सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। केरल हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब सबकी…

केरल: भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पिनाराई विजयन और परिवार, अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी उम्मीदें
(फोटो: IANS)

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) के दिग्गज नेता पिनाराई विजयन और उनका परिवार सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। केरल हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं, जहां शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई होनी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानूनी लड़ाई के परिणाम विजयन के साथ-साथ उनकी पार्टी सीपीआई (एम) के भविष्य पर भी गहरा असर डाल सकते हैं, जो हालिया चुनावी हार से उबरने की कोशिश कर रही है।

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यह पूरा मामला दो अलग-अलग जांचों के इर्द-गिर्द घूमता है। एक मामले में, विजयन अपनी बेटी टी. वीणा और उनकी अब बंद हो चुकी आईटी कंपनी 'एक्सलॉजिक' से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों में पहले आरोपी हैं। वहीं, एक अन्य हवाला लेनदेन से जुड़े मामले में उनके दामाद और पूर्व मंत्री पी. ए. मोहम्मद रियाज पहले आरोपी बनाए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) इन मामलों की जांच कर रहे हैं।

विजयन के साथ खड़ी पार्टी, उठ रहे सवाल

इन गंभीर आरोपों के बावजूद, सीपीआई (एम) नेतृत्व ने पिनाराई विजयन का पूरा समर्थन किया है और विधानसभा में विपक्ष के नेता पद से उनके इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया है। पार्टी के इस कदम ने राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सीपीआई (एम) अक्सर दूसरे दलों के नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर उनकी जवाबदेही की मांग करती रही है। यह स्थिति एसएनसी-लवलिन मामले की याद दिलाती है, जब तत्कालीन पार्टी महासचिव प्रकाश करात ने यह तर्क देकर विजयन का बचाव किया था कि उन्हें पार्टी के प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उस समय उनके पास कोई सरकारी पद नहीं था।

चुनावी हार के बीच बढ़ता संकट

यह कानूनी संकट सीपीआई (एम) के लिए एक बेहद नाजुक समय पर आया है। पार्टी की जिला समितियां अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के कारणों की समीक्षा कर रही हैं। उस चुनाव में वाम मोर्चे की सीटें 99 से घटकर केवल 35 रह गई थीं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटों पर जीत हासिल की थी और भाजपा को भी 3 सीटें मिली थीं। ऐसे में जांच में कोई भी तेजी पार्टी के राजनीतिक संकट को और बढ़ा सकती है, जो अपने गठन के बाद पहली बार किसी भी राज्य में सत्ता में नहीं है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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