चुनावी हार और अंदरूनी कलह के बीच AIADMK की अहम बैठक, पलानीस्वामी के नेतृत्व पर टिकी निगाहें
तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी AIADMK चुनावी झटकों और पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत के दौर से गुज़र रही है। इसी संकटपूर्ण माहौल के बीच पार्टी के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 1 नवंबर को सभी…
तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी AIADMK चुनावी झटकों और पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत के दौर से गुज़र रही है। इसी संकटपूर्ण माहौल के बीच पार्टी के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 1 नवंबर को सभी जिला सचिवों की एक बैठक बुलाई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब 2026 के विधानसभा चुनावों में हार और हालिया उपचुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी पर दबाव काफी बढ़ गया है।
हालांकि बैठक के एजेंडे का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के नियमों के अनुसार, दिसंबर तक जनरल काउंसिल और कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित करना अनिवार्य है। ऐसे में 1 नवंबर को होने वाली चर्चा से यह साफ हो सकता है कि पार्टी नेतृत्व लगातार मिल रही हार की समीक्षा और संगठनात्मक मुद्दों से कैसे निपटेगा।
उपचुनावों में हार से बढ़ा संकट
यह बैठक इस महीने हुए मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद हो रही है, जहाँ AIADMK तीसरे स्थान पर खिसक गई। यह हार पार्टी के लिए इसलिए भी बड़ा झटका है क्योंकि अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में उसने इन दोनों सीटों पर जीत हासिल की थी। इन दो सीटों को गंवाने से पार्टी के भीतर असंतोष और गहरा गया है, जिसने विधानसभा चुनाव में मिली हार के घावों को फिर से हरा कर दिया है। बता दें कि विधानसभा चुनाव में AIADMK सिर्फ 47 सीटें ही जीत पाई थी और सत्ता में वापसी करने में नाकाम रही थी।
वरिष्ठ नेताओं का बढ़ता दबाव
पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें पूर्व मंत्री सी. वी. शनमुगम और एस. पी. वेलुमणि भी शामिल हैं, लगातार हार पर चर्चा के लिए पार्टी की निर्णय लेने वाली इकाइयों की बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं। उपचुनावों के नतीजों ने उनकी इस मांग को और मज़बूत कर दिया है। संकट की शुरुआत विधानसभा चुनावों के बाद ही हो गई थी, जब मई में हुए विश्वास मत के दौरान AIADMK के 25 विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर टीवीके सरकार का समर्थन कर दिया था।
नेतृत्व और बाग़ी गुट में खींचतान
इस बगावत के बाद, पलानीस्वामी ने कई असंतुष्ट नेताओं को उनके संगठनात्मक पदों से हटा दिया था। उदाहरण के लिए, एस. पी. वेलुमणि को उप-महासचिव तो बनाया गया, लेकिन उन्हें कोयंबटूर उपनगरीय दक्षिण जिला इकाई का सचिव पद वापस नहीं दिया गया। दोनों गुटों के बीच तनाव हालिया उपचुनाव प्रचार के दौरान भी साफ दिखा, जब पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची से शनमुगम, वेलुमणि और पूर्व मंत्री पी. थंगामणि जैसे बड़े नेताओं के नाम गायब थे। अब सभी की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि पार्टी चुनौतियों से निपटने के लिए क्या रास्ता अपनाती है।
इनपुट: IANS



