रविवार, 8 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ारों पर मेहरबान, AI शेयरों से मोहभंग के बाद नवंबर में किया ₹46,000 करोड़ का निवेश

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में आई गिरावट के बीच भारत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए एक पसंदीदा ठिकाना बनकर उभरा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ारों पर मेहरबान, AI शेयरों से मोहभंग के बाद नवंबर में किया ₹46,000 करोड़ का निवेश
(फोटो: IANS)

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में आई गिरावट के बीच भारत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए एक पसंदीदा ठिकाना बनकर उभरा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने नवंबर महीने में अब तक भारतीय शेयर बाज़ारों में करीब 45,970 करोड़ रुपए का भारी-भरकम निवेश किया है। इस ताज़ा निवेश की वजह से बाज़ार में ज़बरदस्त तेज़ी देखने को मिली है।

विज्ञापन

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, "भारत में कंपनियों की कमाई में शानदार वृद्धि और लार्ज-कैप शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन ने भारत को निवेश के लिए एक पसंदीदा जगह बना दिया है।" FPI की तरफ से फाइनेंशियल, आईटी, ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम सेक्टर के शेयरों में लगातार खरीदारी की जा रही है, जिसका सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा है।

बाज़ार में क्यों आया यह बदलाव?

विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों के रुख में यह अचानक आया बदलाव अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान जैसे बाज़ारों में AI शेयरों की बिकवाली का नतीजा है। यह बिकवाली अमेरिका में डेटा सेंटरों पर होने वाले खर्च को लेकर पैदा हुई चिंताओं के कारण शुरू हुई। बताया जा रहा है कि हालिया अमेरिकी चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद यह चिंता बढ़ी है, क्योंकि वे डेटा सेंटरों पर अनियंत्रित खर्च के खिलाफ हैं और AI के लिए कुछ नियम-कायदे लागू करने की मांग कर सकते हैं।

बाज़ार में संस्थागत निवेशकों की बदली भूमिका

पिछले हफ्ते बाज़ार में एक दिलचस्प उलटफेर देखने को मिला। जहाँ एक तरफ FPI आक्रामक रूप से खरीदारी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) शुद्ध विक्रेता बन गए। FPI की इस आक्रामक खरीदारी ने बाज़ार में 'शॉर्ट स्क्वीज' की स्थिति पैदा कर दी, जिससे बाज़ार में एक बड़ी तेज़ी आई। बीते एक हफ्ते में निफ्टी ने लगभग 8.6 प्रतिशत का रिटर्न दिया और हफ़्ते के उच्चतम स्तर 25,030.35 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी में भी 8 प्रतिशत की मज़बूती दर्ज की गई। हालांकि, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 5.8% और 2.8% की अपेक्षाकृत कम बढ़त रही।

बाज़ार के जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में इस तेज़ी को बनाए रखने के लिए विदेशी निवेश का जारी रहना बेहद ज़रूरी होगा, क्योंकि घरेलू स्तर पर मुनाफ़ावसूली का दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड की कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी गतिविधियां भी बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →