शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भर्ती संकट से जूझ रहा जैश-ए-मोहम्मद, मसूद अजहर के डीपफेक वीडियो से युवाओं को बना रहा निशाना

पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) अपने सरगना मसूद अजहर की मौजूदगी साबित करने और संगठन में नई भर्तियां करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रहा है। समाचार एजेंसी IANS की…

भर्ती संकट से जूझ रहा जैश-ए-मोहम्मद, मसूद अजहर के डीपफेक वीडियो से युवाओं को बना रहा निशाना
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) अपने सरगना मसूद अजहर की मौजूदगी साबित करने और संगठन में नई भर्तियां करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, संगठन अजहर के डीपफेक यानी नकली ऑडियो और वीडियो क्लिप तैयार कर युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है ताकि वे संगठन से जुड़ सकें।

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यह कदम तब उठाया गया है जब 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद जैश-ए-मोहम्मद को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उसकी भर्ती प्रक्रिया लगभग ठप हो गई। पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने यह अभियान चलाया था, जिसमें कई निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी। इस ऑपरेशन के दौरान न केवल बहावलपुर स्थित जैश का मुख्यालय तबाह हो गया, बल्कि मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदारों समेत अनेक आतंकी भी मारे गए थे।

भर्तियों में भारी गिरावट और AI का इस्तेमाल

खुफिया एजेंसियों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद से ही जैश का शीर्ष नेतृत्व सार्वजनिक तौर पर सामने आने से बच रहा है। मसूद अजहर के लंबे समय तक गायब रहने से संभावित रंगरूटों के मन में उसके सक्रिय होने को लेकर सवाल उठने लगे थे। कई युवाओं ने ऐसे संगठन से जुड़ने में हिचकिचाहट दिखाई, जिसका नेता ही सक्रिय न हो।

पहले जैश ने पुराने ऑडियो-वीडियो क्लिप प्रसारित कर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन इन्हें आसानी से पहचान लिया गया। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि इसी नाकामी के बाद संगठन ने अपनी छवि बचाने और भर्ती प्रक्रिया को फिर से तेज करने के लिए बड़े पैमाने पर AI तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया। अब AI की मदद से ऐसे वीडियो बनाए जा रहे हैं, जिनमें अजहर को सक्रिय रूप से संगठन का नेतृत्व करते, नई भर्ती की अपील करते और भारत के खिलाफ 'जिहाद' का आह्वान करते हुए दिखाया जाता है।

ग्रामीण और कम शिक्षित युवा निशाने पर

अधिकारियों का मानना है कि जैश का यह नया AI-आधारित प्रचार अभियान जानबूझकर कम शिक्षित और ग्रामीण युवाओं को लक्षित कर रहा है। संगठन का मानना है कि इन क्षेत्रों में जेनरेटिव AI जैसी तकनीकों के बारे में जागरूकता कम है, जिससे इन वीडियो की प्रामाणिकता को परखना मुश्किल होता है और लोगों को आसानी से बहकाया जा सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि AI तकनीक इतनी उन्नत हो गई है कि आम लोगों के लिए असली और नकली वीडियो में फर्क करना लगभग नामुमकिन है।

यह भी बताया गया है कि जैश भारत के ग्रामीण इलाकों में भी स्थानीय भाषाओं के अनुसार मसूद अजहर के वीडियो बनाने की योजना बना रहा है। फिलहाल AI के इस्तेमाल से संगठन ने अपनी भर्ती की समस्या को कुछ हद तक काबू कर लिया है, लेकिन मसूद अजहर के बाद नेतृत्व का संकट अभी भी बना हुआ है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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