मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भूटान में जलविद्युत पर भारत का बड़ा दांव, अदाणी पावर और ड्रुक ग्रीन मिलकर लगाएंगे 770 मेगावाट का प्लांट

भारत के अदाणी पावर और भूटान की सरकारी बिजली कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (DGPC) ने मिलकर एक बड़ी जलविद्युत परियोजना पर काम करने की घोषणा की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों…

भूटान में जलविद्युत पर भारत का बड़ा दांव, अदाणी पावर और ड्रुक ग्रीन मिलकर लगाएंगे 770 मेगावाट का प्लांट
(फोटो: IANS)

भारत के अदाणी पावर और भूटान की सरकारी बिजली कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (DGPC) ने मिलकर एक बड़ी जलविद्युत परियोजना पर काम करने की घोषणा की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों कंपनियाँ मध्य भूटान में 770 मेगावाट की चामखरछू-1 जलविद्युत परियोजना स्थापित करेंगी। यह परियोजना दोनों साझेदारों के बीच दूसरी बड़ी जलविद्युत साझेदारी है और इसका उद्देश्य भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

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यह समझौता उस बड़े लक्ष्य का हिस्सा है जिसके तहत अदाणी समूह और DGPC ने मई 2025 में 5,000 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले सितंबर 2025 में 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना के लिए भी एक समझौता हो चुका है।

परियोजना का स्वरूप और साझेदारी

चामखरछू-1 परियोजना भूटान के झेमगांग जिले में चामखरछू नदी पर स्थित होगी। कंपनी के मुताबिक, इसे 'बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर' (BOOT) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इसमें DGPC की 51% और अदाणी पावर की 49% इक्विटी हिस्सेदारी होगी। यह साझेदारी 30 साल की रियायत अवधि के लिए है, जिसकी गणना परियोजना के व्यावसायिक संचालन शुरू होने की तारीख (COD) से की जाएगी।

दोहरे लाभ: सर्दियों में भूटान को बिजली, गर्मियों में भारत को निर्यात

अदाणी पावर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनिल सरदाना ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा, “हम चामखरछू जलविद्युत परियोजना के माध्यम से भूटान की सरकार और डीजीपीसी के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करते हुए बेहद प्रसन्न हैं। दक्षिण एशिया के ऊर्जा बदलाव को तेज करने में जलविद्युत की अहम भूमिका होगी।” उन्होंने बताया कि यह परियोजना सर्दियों में भूटान की बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने में मदद करेगी, वहीं गर्मियों के महीनों में अतिरिक्त हरित बिजली भारत को निर्यात की जाएगी, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा।

इसी तरह, DGPC के प्रबंध निदेशक दाशो छेवांग रिनजिन ने कहा, “यह साझेदारी भूटान के जलविद्युत विकास की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है... 770 मेगावाट की चामखरछू-1 जलविद्युत परियोजना भूटान की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में योगदान देगी, विशेष रूप से सर्दियों के महीनों में।”

निर्माण और भविष्य की योजना

परियोजना का निर्माण कार्य 2027 की पहली छमाही में शुरू होने की उम्मीद है। लक्ष्य यह है कि निर्माण शुरू होने के छह साल के भीतर यह प्लांट व्यावसायिक रूप से बिजली का उत्पादन शुरू कर दे। इस घोषणा के लिए आयोजित समारोह में भूटान के प्रधानमंत्री ल्योंचेन दाशो शेरिंग टोबगे सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद थे।

इनपुट: IANS

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