6G टेक्नोलॉजी: दुनिया की अर्थव्यवस्था में जोड़ सकती है 1.24 ट्रिलियन डॉलर, लेकिन एक बड़ी शर्त है
छठी पीढ़ी की मोबाइल तकनीक, यानी 6G, आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़ी छलांग दे सकती है। उद्योग संगठन GSMA की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2040 तक 6G से दुनिया की जीडीपी में 1.24…
छठी पीढ़ी की मोबाइल तकनीक, यानी 6G, आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़ी छलांग दे सकती है। उद्योग संगठन GSMA की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2040 तक 6G से दुनिया की जीडीपी में 1.24 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त योगदान हो सकता है, जो उस समय की कुल जीडीपी का लगभग 0.7 प्रतिशत होगा। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस विशाल आर्थिक क्षमता को हासिल करने के लिए सरकारों को एक अहम कदम उठाना होगा।
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अगर 6G नेटवर्क के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं कराया गया, तो अनुमानित लाभ का एक बड़ा हिस्सा (करीब 42 प्रतिशत) जोखिम में पड़ सकता है। इसका मतलब है कि लगभग 520 अरब डॉलर का आर्थिक अवसर हाथ से निकल सकता है। GSMA के मुख्य नियामक अधिकारी जॉन जिउस्ती ने कहा, "आने वाले कुछ वर्षों में स्पेक्ट्रम नीति से जुड़े फैसले यह तय करेंगे कि 6G तकनीक से मिलने वाली आर्थिक संभावनाओं का कितना लाभ वास्तव में प्राप्त किया जा सकेगा।"
कौन से सेक्टर होंगे सबसे आगे?
GSMA के विश्लेषण के अनुसार, 6G का सबसे ज़्यादा फ़ायदा विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। कुल आर्थिक योगदान में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत और वित्तीय सेवाओं की 19 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके बाद निर्माण क्षेत्र (13%) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र (12%) का स्थान आता है।
क्यों खास है 6G तकनीक?
यह तकनीक पिछली मोबाइल पीढ़ियों से काफी अलग होगी। इसका विकास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित क्षमताओं के साथ हो रहा है। इससे नेटवर्क खुद-ब-खुद समझदारी भरे फैसले ले सकेंगे, सेंसिंग कार्यों को एकीकृत कर सकेंगे और ज़मीनी तथा सैटेलाइट नेटवर्कों के बीच बिना किसी रुकावट के कनेक्टिविटी प्रदान कर सकेंगे। रिपोर्ट में AI-आधारित कनेक्टिविटी, औद्योगिक रोबोटिक्स और एडवांस ब्रॉडबैंड सेवाओं को भविष्य की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख वाहक बताया गया है।
स्पेक्ट्रम की भूमिका और सिफारिशें
रिपोर्ट में स्पेक्ट्रम की अहमियत पर खास ज़ोर दिया गया है। अनुमान है कि 6G से होने वाले कुल आर्थिक लाभ में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मिड-बैंड स्पेक्ट्रम का होगा। वहीं, लो-बैंड स्पेक्ट्रम ग्रामीण और इनडोर कवरेज के लिए ज़रूरी होगा, जिसका योगदान करीब 25 प्रतिशत रहेगा।
इसी संदर्भ में, GSMA ने सरकारों से कुछ अहम सिफ़ारिशें की हैं:
- मिड-बैंड स्पेक्ट्रम: 2030 तक कम से कम 2 गीगाहर्ट्ज़ मिड-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाए।
- लो-बैंड स्पेक्ट्रम: कवरेज बढ़ाने के लिए 600 मेगाहर्ट्ज़ बैंड को भी उपलब्ध कराया जाए।
- स्पष्ट रोडमैप: नियामक एक स्पष्ट राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम रोडमैप तैयार करें, ताकि टेलीकॉम कंपनियों को निवेश की योजना बनाने में मदद मिले।
यह रिपोर्ट 2027 में होने वाले विश्व रेडियो संचार सम्मेलन से पहले आई है, जहां भविष्य की तकनीकों के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन पर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय फैसले लिए जाने हैं।
इनपुट: IANS



