सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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RBI की मौद्रिक नीति बैठक शुरू: क्या इस बार बढ़ेंगी ब्याज दरें?

बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन दिनों…

RBI की मौद्रिक नीति बैठक शुरू: क्या इस बार बढ़ेंगी ब्याज दरें?
(फोटो: IANS)

बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक के नतीजों पर विशेषज्ञों और आम लोगों की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसमें रेपो रेट यानी ब्याज दरों पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।

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बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 7 अक्टूबर को फैसलों की घोषणा करेंगे। बाजार इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या केंद्रीय बैंक फरवरी 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा या उन्हें मौजूदा 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखेगा।

बढ़ोतरी की आशंका क्यों?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार RBI पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव है। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई दर 4.45% थी, जो अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई।

बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) का अनुमान है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और अन्य दबावों के चलते RBI अक्टूबर में ही ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (0.25%) की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि पहले यह अनुमान दिसंबर के लिए था। बोफा के अनुसार, "लगभग दो साल तक मौद्रिक समर्थन देने के बाद, ऐसा लगता है कि आरबीआई अक्टूबर की एमपीसी बैठक में पॉलिसी सपोर्ट को धीरे-धीरे कम करने के लिए शुरुआती कदम उठा सकता है।"

अन्य कारक और वैश्विक संकेत

SBI की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक जोखिमों को देखते हुए "देर करने के बजाय पहले से कदम उठाना समझदारी होगी।" इसके अलावा, अल-नीनो के प्रभाव और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश की आशंका रबी फसल के उत्पादन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, जिससे आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी RBI के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखने की गुंजाइश कम कर रही है।

इनपुट: IANS

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