तिजारा नगर परिषद चुनाव: वोटिंग से ठीक पहले कांग्रेस समर्थित 18 पार्षदों को हरियाणा पुलिस द्वारा हिरासत में लेने का आरोप
राजस्थान के तिजारा नगर परिषद में चेयरमैन पद के चुनाव से ऐन पहले एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके समर्थन वाले करीब 18 पार्षदों को हरियाणा पुलिस ने उस…
राजस्थान के तिजारा नगर परिषद में चेयरमैन पद के चुनाव से ऐन पहले एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके समर्थन वाले करीब 18 पार्षदों को हरियाणा पुलिस ने उस वक्त हिरासत में ले लिया, जब वे हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना रविवार देर रात हरियाणा के चंडीमंदिर (सूरजपुर) टोल प्लाजा के पास हुई, जिससे सोमवार को होने वाली वोटिंग पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इस घटना के विरोध में कांग्रेस नेता और समर्थक पिंजौर पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए हैं और पार्षदों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। तिजारा के कांग्रेस नेता इमरान खान ने आरोप लगाया कि पार्षदों को ले जा रही बस और अन्य गाड़ियों को हरियाणा पुलिस ने रोका। उनके अनुसार, पुलिस की कुछ गाड़ियों पर नंबर प्लेट नहीं थी, जबकि कुछ पर ढकी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस समर्थित 18-19 पार्षदों को उनकी गाड़ियों समेत पिंजौर पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
चुनाव का गणित और पार्षदों की यात्रा
तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं और चेयरमैन पद पर जीत के लिए 18 पार्षदों के समर्थन की जरूरत होती है। हाल के चुनावों में 31 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे, जबकि भाजपा को तीन और कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली थी। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि 17 निर्दलीय पार्षदों ने उन्हें समर्थन दिया है, जिससे उनके पास बहुमत का 18 का आंकड़ा पूरा हो गया है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने इन सभी पार्षदों को वोटिंग से पहले हिमाचल प्रदेश भेजा था।
वरिष्ठ नेताओं के आरोप और पुलिस का पक्ष
पार्षदों के साथ यात्रा कर रहे तिजारा के पूर्व विधायक संदीप यादव ने एक वीडियो जारी कर पुलिस पर राजनीतिक कारणों से दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को डर था कि कांग्रेस तिजारा में अपना म्युनिसिपल बोर्ड बना लेगी। बाद में संदीप यादव को तो रिहा कर दिया गया, लेकिन पार्षद हिरासत में ही रहे।
इस मामले पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "भाजपा ने अब लोकतंत्र की हत्या में न केवल राजस्थान पुलिस बल्कि हरियाणा पुलिस को भी शामिल कर लिया है... यह कोई सामान्य जांच नहीं थी, बल्कि पूरी तरह से पहले से सोची-समझी और टारगेटेड कार्रवाई थी।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब राजस्थान के मुख्यमंत्री के निर्देश पर हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा है।
वहीं, तिजारा के डीएसपी शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। उनके मुताबिक, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हरियाणा पुलिस की किस यूनिट ने पार्षदों के समूह को रोका था और शिकायत की पुष्टि के बाद ही उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इनपुट: IANS



