Hijab row: हिजाब विवाद बड़ी बेंच के पास, आज हाई कोर्ट को क्या करना है फैसला, सुनवाई से पहले जानिए 10 बड़ी बातें

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Hijab row: हिजाब विवाद बड़ी बेंच के पास, आज हाई कोर्ट को क्या करना है फैसला, सुनवाई से पहले जानिए 10 बड़ी बातें

बेंगलुरु: कर्नाटक हाई कोर्ट की एक पूरी पीठ गुरुवार को स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पर राज्य सरकार के प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। एकल-न्यायाधीश पीठ के अनुरोध पर अब पूरी पीठ सुनवाई कर करेगी। एकल न्यायाधीश ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश मामले पर गौर करने के लिए बड़ी पीठ के गठन का फैसला कर सकते हैं। न्यायमूर्ति दीक्षित ने कहा, ‘उपरोक्त परिस्थितियों में, रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह मामले में तत्काल अनुरोध के संबंध में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष कागजात पेश करे। मुख्य न्यायाधीश के निर्णय लेने के बाद याचिकाकर्ता अंतरिम राहत की मांग कर सकते हैं। गुरुवार दोपहर 2.30 बजे पूर्ण पीठ इस केस की पहली सुनवाई करेगा। उससे पहले दस जरूरी पॉइंट्स जानें….

1- राज्य कैबिनेट ने हिजाब विवाद पर कोई भी फैसला लेने से पहले उच्च न्यायालय के आदेश का इंतजार करने का निर्णय किया है।

2- सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित ने कहा कि पर्सनल लॉ के कुछ पहलुओं के मद्देनजर ये मामले बुनियादी महत्व के कुछ संवैधानिक प्रश्नों को उठाते हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसे मुद्दे जिन पर बहस हुई और महत्वपूर्ण सवालों की व्यापकता को देखते हुए अदालत का विचार है कि मुख्य न्यायाधीश को यह तय करना चाहिए कि क्या इस विषय के लिए एक बड़ी पीठ का गठन किया जा सकता है।’

3- राज्य सरकार का स्टैंड यह था कि किसी भी छात्र को निर्धारित यूनिफॉर्म के अलावा अन्य कपड़े पहनने की अनुमति देना अधिमान्य व्यवहार और अनिवार्य ड्रेस कोड का उल्लंघन होगा। यह अन्य छात्रों के समानता के अधिकार का भी उल्लंघन होगा, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 14 में अधिकार प्राप्त है।

4- हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने पीठ से अंतरिम आदेश देने का अनुरोध किया क्योंकि परीक्षाएं दो महीने दूर हैं और छात्रों को उनकी शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

5- मुस्लिम छात्राओं की ओर से पेश अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अनुरोध किया कि लड़कियों को ‘उनकी संस्कृति का पालन करने’ की अनुमति दी जाए। कर्नाटक के महाधिवक्ता प्रभुलिंग के नवदगी ने अंतरिम राहत देने और छात्राओं को हिजाब पहनकर कॉलेजों में जाने की अनुमति देने का विरोध किया।


6- बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने बेंगलुरु शहर में विद्यालयों, महाविद्यालयों, डिग्री कॉलेजों या इसी तरह के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के गेट से 200 मीटर के दायरे में बुधवार से 22 फरवरी तक दो सप्ताह की अवधि के लिए किसी भी सभा, आंदोलन या प्रदर्शन के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

7- महाधिवक्ता प्रभुलिंग के नवदगी ने अदालत में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद जुबैर कॉर्पोरल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य मामले में यूनिफॉर्म की प्रासंगिकता और एक विशिष्ट विशेषता के रूप में इसके महत्व पर चर्चा की थी।

8- अजमल खान बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए, राज्य सरकार ने आगे तर्क दिया कि हिजाब पहनना एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।

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उडुपी के छात्र याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि लड़कियों के पास अपने शैक्षणिक वर्ष के केवल दो महीने बचे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि ये छात्राओं को कॉलेज जाने दिया जाए, दो महीने में कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा। कोई भी लड़की शिक्षा से वंचित नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि छात्राएं हिजाब पहनकर स्कूल जाएं या न जाएं लेकिन प्रिंसिपल को उन्हे क्लास में हिजाब पहनने से नहीं रोका जा सकता है।

10- कर्नाटक शिक्षा अधिनियम में यूनिफॉर्म के बारे में कुछ भी नहीं है। पाठ्यक्रम का क्या? यहां तक कि राज्य सरकार क्या कुछ बच्चों पर पावर दिखा सकती है? नहीं। छात्रों के कॉलेज विकास समिति से संपर्क करने के लिए महाधिवक्ता के सुझाव पर, वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि इसका मतलब छात्रों को उनके संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए किसी समिति पर निर्भर रहना होगा?

India Hijab Controversy

हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन



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