High Rise Societies: नक्शे के बाद ग्रुप हाउसिंग की मजबूती देखने का नहीं है कोई सिस्टम

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High Rise Societies: नक्शे के बाद ग्रुप हाउसिंग की मजबूती देखने का नहीं है कोई सिस्टम

नई दिल्ली: गुड़गांव की हाई राइज सोसाइटी सेंट्रल पैराडिसो (Central Paradiso) के डी टावर में गुरुवार देर शाम कुछ फ्लोर की सीलिंग गिर गई थीं। इस हादसे के बाद नोएडा व ग्रेटर नोएडा की बहुमंजिला इमारतों (Multi Storey Buildings) में रहने वाले भी डर गए हैं। यहां जिन सोसाइटीज में प्लास्टर गिर रहा है या सीलन की समस्या है, उनमें रहने वाले स्ट्रक्चरल मजबूती को लेकर और घबरा गए हैं। ऊंची इमारतों की मजबूती स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) से परखी जाती है। हैरानी की बात यह है कि शहर में ऐसा कोई सिस्टम ही नहीं है। प्लॉट देकर नक्शा पास करने वाली नोएडा अथॉरिटी में भी नहीं है। 5 साल में 20 से ज्यादा सोसाइटीज में स्ट्रक्चर की मजबूती पर सवाल उनमें रहने वालों ने उठाए, लेकिन किसी में भी इसकी गुणवत्ता जांचने के लिए ऑडिट नहीं हुआ।

अथॉरिटी में ऐसे पास होता है नक्शा
नक्शा सही व सुरक्षित है, इसका परीक्षण बिल्डर को ही आईआईटी या ऐसी कोई सरकारी एजेंसी से करवाकर नोएडा अथॉरिटी को देना होता है। अथॉरिटी इसी आधार पर नक्शा पास कर देती हैं। इसके बाद नक्शे के मुताबिक निर्माण देखा जाता है। बिल्डिंग मटीरियल की गुणवत्ता परखने का कोई प्रावधान अपार्टमेंट एक्ट में ना होने के बात अधिकारी कहते हैं

ऑडिट करवाएं पर खर्च कौन करेगा
अथॉरिटी ने छह-सात महीने में आईआईटी (IIT) व सीबीआरआई (CBRI) को पत्र भेजकर तीन ग्रुप हाउसिंग के स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए कहा, पर एक भी इमारत का नहीं हुआ। अथॉरिटी इसे करवाए, पर उसका खर्च देने को बिल्डर तैयार नहीं होते हैं। एक सोसाइटी के स्ट्रक्चरल ऑडिट में करीब 30 लाख का शुरुआती खर्च अनुमानित है। ऑडिट में सामने आने वाले सुझाव पर काम करवाने का अलग खर्च होता है।
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प्राइवेट एजेंसियां मांगती हैं लाखों रुपये

पिछले दिनों नोफा ने कुछ प्राइवेट एजेंसियों से संपर्क किया तो इन्होंने एक टावर के स्ट्रक्चरल ऑडिट के ही दो से ढाई लाख रुपये मांग लिए। स्ट्रक्चरल मजबूती के सुझाव चाहिए तो अलग से फीस मांगी।

जिन एजेंसियों ने स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट दिया, उसे अथॉरिटी कह चुकी है अवैध

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में 70 से ज्यादा ग्रुप हाउसिंग सोसायटी हैं। इनमें बहुत सी सोसाइटीज में स्ट्रक्चर के बुरे हाल हैं। निवासियों के अनुसार ज्यादातर बिल्डरों के पास जामिया का स्पेशल सर्टिफिकेट है, जबकि उसे अथॉरिटी ने अवैध करार दे दिया है। अब किसी सोसाइटी या किसी और संस्था का सर्टिफिकेट नहीं आया है। श्री राधा स्काई गार्डन के निवासियों की शिकायत पर जामिया का स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट अवैध घोषित किया गया था।

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